जमुई पुलिस के जनता दरबार में न्याय की जगह फरियादी को मिला थप्पड़

जमुई, (राजेश कुमार) : जमुई के चरकापत्थर थाना परिसर में थाने की फ्रेंडली पुलिस ने जनता दरबार में आए एक फरियादी के गाल पर थप्पड़ जड़ कर पुलिस पब्लिक फ्रेंडली होने के प्रयासों को जुमला साबित कर दिया है. घटना के बावत बताया जा रहा है कि जिले के अति नक्सल प्रभावित चरकापत्थर थाना परिसर में शनिवार को जनता दरबार आयोजित किया गया था. जिसमें जमीनी विवाद सुलझाने पहुंचे एक युवक के साथ पुलिस ने मारपीट की. जिले के अतिसंवेदनशील समझे जाने वाले इस क्षेत्र के थाना परिसर में आयोजित जनता दरबार में फरियादी की बेवजह पिटाई कर देने के मामले ने एक बार फिर पुलिस के कथनी और करनी में अंतर दिखा दिया है.

जानकारी के मुताबिक शनिवार को चरकापत्थर थाना क्षेत्र के घोड़वासालन गांव निवासी रूपन यादव जमीनी विवाद के निष्पादन को लेकर थाना पहुंचे थे. वहां मौजूद अंचलाधिकारी , थानाध्यक्ष व अन्य के समक्ष उक्त थाने में पदस्थापित सअनि मो. अब्बास ने किसी बात को लेकर रूपन को दो थप्पड़ जड़ दिए.

दरअसल उक्त मामले में चरकापत्थर थानाध्यक्ष शंभू शर्मा ने दलील दी है कि रूपन यादव ने शराब पी रखी थी. जबकि प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि ऐसी बात नहीं थी. अब सवाल यह है कि यदि रूपन ने शराब पी हुई थी और थाने परिसर में मौजूद था तो पुलिस ने उसकी मेडिकल जांच क्यों नहीं कराई. सवाल यह भी है कि क्या कानून के शासन की पैरोकार पुलिस को बेगुनाह जनता पर हाथ उठाने का अधिकार है और वह भी थाना परिसर में आयोजित जनता दरबार में.

आपको बता दें कि जमुई पुलिस को फ्रेंडली होना था. इसके लिए पुलिस कप्तान द्वारा कई कार्य किए जा रहे थे. यहां तक की पुलिस पब्लिक रिलेशन को बेहतर बनाने के लिए कई कदम उठाने की बात कही जा रही थी. अभी तीन चार दिन पहले ही ग्रैजुएट आरक्षियों को जिले के सभी थानों में पदस्थापित करने की बात स्वयं पुलिस कप्तान जे रेड्डी ने कही थी. उन्होंने कहा था कि इन ग्रेजुएट आरक्षियों को थाना प्रबंधक के नाम से जाना जाएगा और इनकी भूमिका थाने में इंटरनेट सेवा से लेकर अन्य चीजों का ख्याल रखना तथा थाना पहुंचने वाले फरियादियों को बैठाने से लेकर थानाध्यक्ष से उन्हें मिलवाने की व्यवस्था करना भी होगा.

हालांकि चरकापत्थर थाना परिसर में घटे इस बाकये के बाद थानाध्यक्ष शम्भू शर्मा ने कहा कि शनिवार को जनता दरबार मे आए रूपन यादव ने शराब पी रखी थी शायद इसी कारण सअनि मु अब्बास ने आपा खो दिया होगा. पूरे मामले पर उनकी नजर है. जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकता है. लेकिन इन सबके बावजूद अंत में एक सवाल यह भी कि क्या पुलिस का ऐसा व्यवहार पुलिस और पब्लिक को फ्रैंडली बना पाएगा अथवा घोर नक्सल प्रभावित ऐसे क्षेत्रों में पब्लिक के साथ पुलिस का यह व्यवहार हमें नक्सलवाद से मुक्ति दिला पाएगा.. सोंचिये !

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