सन्हौली दुर्गा मंदिर : प्रतिमा में सरस्वती की आकृति प्रकट होना विस्मयकारी

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खगड़िया : शारदीय नवरात्र गुरूवार से प्रारंभ हो चुकी है. मां दुर्गा की आराधना के लिए नवरात्रा का समय सर्वोत्तम माना जाता है. इस बीच जिले के विभिन्न दुर्गा मंदिरों में माता की पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालु जुटने लगे हैं. सदर प्रखंड के सन्हौली पंचायत में स्थित प्रसिद्ध दुर्गा मंदिर आज जिले में आस्था व विश्वास का एक अटूट केन्द्र बन चुका है. माना जाता है कि यहां मां के कई रूपों की झलक दिखती है. साथ ही सिद्धपीठ के रूप में चर्चित इस मंदिर की पौराणिक प्रतिमा में सरस्वती के रूप में आकृति प्रकट होने की घटना को विस्मयकारी माना जाता है. शायद यही कारण रहा है कि दिन प्रतिदिन इस मंदिर की महिमा में निरंतर वृद्धि हो रही है.

बताया जाता है कि इस मंदिर में स्थापित मां की प्रतिमा बरौनी-कटिहार रेल खंड के निर्माणकाल में कोशी व बूढी गंडक से मिलती धारा को पाटने के क्रम में मिली थी. माना जा रहा है कि यह मूर्ति लगभग 125 वर्ष पुरानी है. उन दिनों जमींदार महेन्द्र नारायण सिंह व हरि प्रसाद सिंह के कुल पुरोहित पंडित गोपीनाथ ठाकुर हुआ करते थे. पंडित ठाकुर ने ही यजमान महेन्द्र नारायण सिंह के सहयोग से जिला मुख्यालय को जोड़ती हाजीपुर मौजा एवं सन्हौली मौजा की सीमा पर भगवती की प्रतिमा को प्राण-प्रतिष्ठा के साथ स्थापित किया था.

शुरूआत के ईंट-खपरैल के गहबर को कालांतर में सुर्खी-चूना से जोड़ कर मंदिर का निर्माण किया गया. वर्तमान में ट्रस्ट मंदिर के लिये काम कर रही है. आज भी लोग सेविका यशोदा देवी, स्व.कुशेश्वर प्रसाद अम्बष्ठा, केदार नारायण सिंह, स्व.जगदीश सिंह व स्व .उपेन्द्र नारायण सिंह को याद करते हैं, जिन्होनें मंदिर के नव-निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा की थी.

हालांकि रेल ऑवर ब्रीच के निर्माण की वजह से इस वर्ष श्रद्धालुओं को मां का दर्शन करने में परेशानियों से भी जूझना होगा. उल्लेखनीय है कि पूर्वी रेल केबीन के स्थाई रूप से बंद होने के बाद श्रद्धालुओं को फुट ऑवर ब्रीज पर चढकर मां की मंदिर तक पहुंचना मजबूरी होगी. जो महिलाओं, बच्चों सहित वृद्धों के लिए परेशानी का सबब पैदा कर सकती है. वहीं बारिश के बीच इधर की सड़कों की जर्जर स्थिति से भी श्रद्धालुओं को दो-चार होना होगा. बाबजूद इसके इन सारी परेशानियों पर मां के प्रति आस्था भारी पड़ सकता है.

नवरात्र में मां के नौ रूपों की होगी पूजा…

21 सितंबर : मां शैलपुत्री की पूजा
22 सितंबर : मां ब्रह्मचारिणी की पूजा
23 सितंबर : मां चंद्रघंटा की पूजा
24 सितंबर : मां कूष्मांडा की पूजा
25 सितंबर : मां स्कंदमाता की पूजा
26 सितंबर : मां कात्यायनी की पूजा
27 सितंबर : मां कालरात्रि की पूजा
28 सितंबर : मां महागौरी की पूजा
29 सितंबर : मां सिद्धिदात्री की पूजा
30 सितंबर : विजयादशमी

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