जदयू कार्यालय के दहलीज तक नहीं पहुंच पाई विकास गाड़ी

खगड़िया : अमूमन यहां हर रोज सजती है दरबार. होती हैं विकास की बातें और बनती है सरकार की विकासात्मक योजनाओं को घर-घर तक पहुंचाने की योजना. फिर संगठन के कार्यकर्ता अपने-अपने वाहनों पर हिचकोले खाते हुए जैसे-तैसे यहां से चल निकलते हैं.

लेकिन दफ्तर के दहलीज पर अवस्थित एक मुख्य मार्ग को अब तक विकास का दीदार नहीं हो सका है. बेसुध, बेसहारा हर आने-जाने वालों से पूछती नजर आती है यह सडक कि आखिर किस गली से आई विकास और किधर से निकल गई वो? जी हां, हम बात कर रहे हैं सूबे के सत्तारूढ़ दल जदयू के जिला कार्यालय सहित पार्टी के जिलाध्यक्ष के आवास वाली सडक का.

गोशाला से समीर नगर को जोड़ने वाला उस प्रमुख मार्ग का, जिस मार्ग में जिले का एक प्रतिष्ठित विद्यालय डीएवी पब्लिक स्कूल अवस्थित है. वहां से हर रोज छोटे-छोटे बच्चे सड़क की दुर्दशा को कोसते हुए स्कूल को जाते हैं और बारिश न हो ऐसी दुआ फरमाते हैं. लेकिन प्रकृति की भी कुछ बंदिशें हैं. एक बार फिर इस भी वर्ष जिले में मानसून दस्तक देने को बेताब है लेकिन अब तक इन मासूमों का दर्द न तो स्थानीय जनप्रतिनिधियों के दिल पर दस्तक दे सकी है और न ही सत्तारूढ दल जदयू के जिलाध्यक्ष ही इस मासूमों के मर्म को महसूस कर पाये हैं.

यह अलग बात है कि संगठन के कई स्थानीय पदाधिकारियों के बच्चे भी इसी स्कूल में पढते हैं और इन समस्याओं से इन्हें भी आये दिन रू-ब-रू होना पड़ता है. बाबजूद इसके यह सडक अपनी बदहाली पर चार-चार आंसू बहा रहा है. स्कूली बच्चे न तो राजनीति जानते हैं, न राजनेताओं के दिल को पहचानते हैं और न ही उन्हें सिस्टम की सुस्ती की ही परख है. वो तो बस अपनी मासूम आंखों से हर रोज यही सवाल कर रहे हैं कि नेता अंकल, यह सडक कब बनेगी?

उल्लेखनीय है कि बरसात के मौसम में इस सडक पर व्यस्कों के लिए भी पैदल चलना दुर्घटनाओं को दावत देने के समान होता है. ऐसे में अमूमन हर रोज कीचड़ में गिरे कुछ स्कूली बच्चों को वापस घर को लौटना पडता रहा है. यह स्थिति वर्षों से चली आ रही है और वर्तमान हालत को देखते हुए ऐसे माना जा रहा है कि इस साल भी इन स्कूली बच्चों सहित सघन आबादी वाले इस क्षेत्र के वासियों को इन समस्याओं से दो-चार होना पडेगा. ऐसे में आक्रोशित लोग अब सवाल खडा करने लगे हैं कि आखिरकार सुशासन बाबू के विकास की गाड़ी की हवा जिले में पार्टी कार्यालय के दहलीज पर ही क्यों निकल जा रही है?