खगड़िया: महागठबंधन की फूट पर फिर भारी पड़ सकता है रिश्तों का बंधन

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खगड़िया: जेल से ही निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर जीतकर जिले की राजनीति में धमाकेदार इंट्री करने वाले पूर्व विधायक रणवीर यादव फिलहाल एक बार फिर एक पूराने मामले की वजह से जेल में हैं. बावजूद इसके जिले की राजनीति में इनकी भूमिका कमतर नहीं आंका जा सकता है. विगत दिनों एक मामले में पेशी के लिए जब वो खगड़िया न्यायालय आये तो बताया जाता है उन्होंने वहां मौजूद अपने समर्थकों से अागामी लोक सभा चुनाव में कृष्णा कुमारी यादव की जीत सुनिश्चित करने के लिए जुट जाने की अपील की.

उल्लेखनीय है विगत आम सभा चुनाव में उनकी पत्नी कृष्णा कुमारी यादव राजद की प्रत्याशी रही थी और जदयू की सीटिंग सीट पर उन्होंने मोदी लहर में एनडीए प्रत्याशी के सामने सीधी चुनौती पेश कर गई थीं. हलांकि उस चुनाव के वक्त महागठबंधन अस्तित्व में नहीं आया था और जदयू के निर्वतमान प्रत्याशी दिनेश चन्द्र यादव भी पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में थे. बाबजूद इसके पूर्व विधायक रणवीर यादव की पत्नी जदयू विधायक पूनम देवी यादव ने अपनी बहन राजद प्रत्याशी कृष्णा कुमारी यादव के पक्ष में खुलकर प्रचार किया.

विगत विधान सभा चुनाव के पूर्व महागठबंधन के अस्तित्व में आने साथ ही रणवीर फैमिली की राजनीतिक असमंजसता लगभग समाप्त हो गई थी. उस वक्त का एक दिलचस्प वाकया है कि जब पूर्व विधायक रणवीर यादव से पूछा गया कि वो किस राजनीतिक दल के नेता हैं तो उनका हाजिर जवाब मिला था महागठबंधन का. बहरहाल महागठबंधन टूट चुका है और जदयू व राजद की राहें अलग हो चुकी है. सूबे के बदले राजनीतिक हालात के बाद पूर्व विधायक रणवीर यादव किस ओर खड़ा हैं यह एक अलग विषय है.

लेकिन इतना तो कहा ही जा सकता है कि स्थानीय जदयू कार्यकर्ताओं ने उन्हें राजद का मान लिया है.विगत दिनों जिले में आयोजित जदयू कार्यकर्ता सम्मेलन के दौरान शहर में लगाये गये पोस्टर-बैनर में पूर्व विधायक की तस्वीरों का गायब रहना इस बात का संकेत दे गया.हलांकि पूर्व विधायक की पत्नी जदयू विधायक पूनम देवी यादव ने सम्मेलन के दौरान अपने संबोधन में रणवीर यादव का जिक्र जरूर किया लेकिन इसे परिवारिक रिश्तों के तौर पर ही देखा गया.

दूसरी तरफ राजद के पूर्व प्रत्याशी कृष्णा कुमारी यादव की आगामी चुनाव के मद्देनजर चहलकदमी बढती जा रही है. दुर्गापूजा के दौरान खगडिया लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाला सिमरी बख्तियारपुर के उनके दौरे को भी राजनीति के चश्में से ही देखी जा रही है. वहीं हाल के दिनों में राजद के जिलास्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक के कार्यकर्मों में उनकी मजबूत उपस्थिति चुनावी तैयारियों का ही संकेत दे रहा है. यदि सारी परिस्थियां अनुकूुल रही तो वो एक बार फिर राजद प्रत्याशी के तौर पर आगामी आम चुनाव में मैदान में दिख सकती हैं. ऐसे में जिले में महागठबंधन की टूट पर फिर पारिवारिक रिश्तों का बंधन भारी पर सकता है.