नए मंत्रीमंडल में भी अधूरी रह गई जदयू विधायकों की आस

खगडिया : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नए कैबिनेट में विभिन्न जिलों  के विधायकों का मंत्री पद की शपथ लेने के साथ ही जिले के जदयू विधायकों सहित आमजनों की आस इस बार भी अधूरी रह गई. लेकिन इसे वर्तमान लोकतांत्रिक व्यवस्था की खुबसूरती कहें या विडंबना कि जिस उम्मीदवार को जिले के अलौली विधान सभा के मतदाताओं ने विगत चुनाव में नकार दिया था, उसे नए मंत्रीमंडल में जगह मिली है.

नए मंत्रियों के नाम सामने आने के बाद शायद यही एक बात जिलेवासियों के लिए सकून की रही है. गौरतलब है कि वर्ष 2010 के चुनाव में जदयू प्रत्याशी ने ही लोजपा सुप्रिमो रामविलास पासवान के भाई सह लोजपा प्रत्याशी पशुपति कुमार पारस को उनके परम्परागत जीत के मिथक को तोडा था. वहीं वर्ष 2015 के चुनाव में महागठबंधन के तहत यह सीट राजद कोटे में आई थी और एक बार पुनः राजनीति के युवा खिलाडी चंदन कुमार ने उन्हें मात दे दी. वक्त के साथ सूबे की राजनीतिक हालात बदले और एक बार फिर पारस की राजनीतिक तकदीर बदली और वो दोनों सदनों में से किसी का सदस्य नहीं होने के बाबजूद मंत्री पद पर बैठ  गये.

 

बात यदि जिले के जदयू विधायकों की करें तो परबत्ता के विधायक आर.एन.सिंह पूर्व में नीतीश मंत्रीमंडल में मंत्री भी रह चुके है. वहीं सदर विधायक पूनम देवी यादव अक्टूबर 2005 के चुनाव से ही पार्टी का प्रतिनिधित्व करते आ रहीं है. कुछ ऐसी ही स्थिति बेलदौर के जदयू विधायक पन्नालाल सिंह पटेल की भी रही है. हलांकि इस बार कुल 26 विधायकों-विधान पार्षदों ने ही मंत्री पद की शपथ ली है. ऐसे में जिले के तीनों जदयू विधायकों सहित जिलेवासियों की नजर मंत्रीमंडल के विस्तार पर रहेगी. ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि वर्षों से पार्टी को अपनी सेवाएं देते आ रहे इन विधायकों को भविष्य में पार्टी सुप्रिमो कितनी तबज्जों देते हैं.

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