सोशल : जी हां… हीनका के कर्मियों के किरिया पर भरोसा नैयखे

खगड़िया : ‘सतर्कता अभिचेतना सप्ताह’ के अवसर पर सोमवार को समाहरणालय के कर्मचारियों व पदाधिकारियों को जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी द्वारा रिश्वत ना लेने की शपथ दिलाने की खबरों के बीच सोशट साइट पर आ रही प्रतिक्रिया एक लंबी बहस को जन्म दे गया है. इन प्रतिक्रियाओं पर यदि गौर करें तो दर्जनों सोशल यूजरों को सरकारी नुमाइंदे द्वारा लिए गये ऐसे किसी शपथ का पालन करने पर भरोसा नहीं है. ऐसे में माना जा सकता है कि भ्रष्टाचार के आकंठ में डूबे कुछ लोगों की ओछी हरकत से पूरा महकमा ही बदनामी के कगार पर खडा है. ऐसी स्थिति में सरकारी महकमे को आमजनों के विश्वास को जीतना किसी चुनौती से कम नहीं प्रतित हो रही है.

आईये एक नजर डालें सोशल साइट के कुछ चुनिन्दा पोस्टों पर…
सूरज कुमार यादव लिखते है कि “रिश्वत नहीं लेने की शपथ तो अधिकार लेने के पहले भी खायें जाते हैं. ऐसे में इसे खानें से क्या होगा, पचाना भी जरूरी है.” नगर परिषद के वार्ड पार्षद सोहन कुमार चौधरी लिखते है कि “जिला प्रशासन यदि सदर प्रखंड या अंचल में चल रहे रिश्वतखोरी को 50 प्रतिशत भी कम कर दे तो ये कसम नाटक का सफल मंचल कहलायेगा.”

वहीं वार्ड वार्षद शिवराज यादव लिखते है कि “ये तो वही बात हो गई कि बिल्ली दूध से दोस्ती करेगा तो खायेगा क्या” ? एआईएसएफ के जिला सचिव रजनीकांत अपनी टिप्पणी में इसे नौंटकी करार देते है.कुंदन कुमार यादव लिखते है कि “सब नाटक है”.

इसके साथ ही रंजन सिन्हा, जितेन्द्र गुप्ता,दिलीप कुमार राणा, मनीष यादव विक्रम कुमार पटेल,अमित बंशल,रंजीत कुमार सिंह, गुग्गु यादव, अश्वनी कुमार, रवि कुमार रवि, मो.इकबाल आलम, उदय शंकर, रौशन राणा, संजीव देव यादव, मृत्युंजय कुशवाहा, मनीष कुमार, राहुल कुमार, अमन झा, लोकेश कुमार, पाण्डव कुमार, कुंदन कुमार यादव, शशांक शेखर, सूरज कृष्णा यादव, अशीष रोहन, राजेश कुमार गुप्ता आदि ने भी मामले पर अपनी-अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है.

और तो और कुछ पाठकों ने तो इस खबर को प्रकाशित करने वाले पत्रकारों को भी नहीं बख्सा है.

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