गरीबों के साथ ये कैसा मजाक! एक कंबल के लिए रात भर ठिठुरा दिया…

खगड़िया: कहा जाता है कि भारतीय रेड क्रॉस सोसायटी एक ऐसा संगठन है जो मानव जीवन और स्वास्थ्य की रक्षा के लिए है. माना जाता है कि इसका उद्देश्य जीवन तथा स्वास्थ्य की सुरक्षा करना एवं मानव मात्र का सम्मान सुनिश्चित करना है. लेकिन शनिवार को जिले के रेड क्रास सोसायटी के पदाधिकारियों के कार्यप्रणाली की जो तस्वीर उभर कर सामने आई है वो ना सिर्फ संस्था के उद्देश्यों से भटकता हुआ प्रतित होता है, बल्कि गरीबों के साथ एक भद्दा मजाक भी जान पड़ता है.

प्राप्त जानकारी के अनुसार रेड क्रॉस सोसायटी के स्थानीय पदाधिकारियों के द्वारा जिले के चौथम प्रखंड के ठुठ्ठी मोहनपुर गांव के गरीबों को कंबल के लिए जिला मुख्यालय स्थित संस्था भवन में बुलाया गया है. कंबल की चाहत में गांव के दर्जनों गरीब शनिवार की सुबह रेड क्रॉस सोसायटी भवन पहुंच गये. जिसमें से अधिकांश महिलाएं व वृद्ध शामिल थे. उसके बाद सोसायटी के द्वारा कंबल वितरण किये जाने की आस में इन गरीबों का इंतजार इतना लंबा हो गया कि सुबह से शाम और फिर रात हो गई.

आखिरकार सोसायटी के सदस्यों के द्वारा इन लोगों को बताया गया कि अब कंबल का वितरण कल यानी रविवार को होगा. ऐसे में इन गरीबों ने रात रेड क्रॉस सोसायटी परिसर में ही गुजारने की ठानी. लेकिन इन गरीबों के गरीबी पर जुल्म अभी बांकि था. देर रात सुरक्षा गार्ड ने सुरक्षा कारणों से सभी को रेड क्रॉस भवन परिसर से बाहर निकाल दिया और सभी देखते ही देखते सड़कों पर आ गये.

ऐसे में सोसायटी के बेरूखी से हतास व परेशान कुछ लोग रोड क्रॉस भवन के निकट स्थित सामाजिक कार्यकर्ता बाबूलाल शौर्य के आवास पर पहुंचे. लेकिन उनकी तादाद इतनी थी कि उनके ठहरने का मुक्कमल व्यवस्था आसान नहीं था. हालांकि बाबूलाल शौर्य अपने आवास पर नहीं थे. लेकिन वहां मौजूद उनके भाई ने मामले की जानकारी बाबूलाल शौर्य को दी और उन्होंने एक सार्थक प्रयास करते हुए पुलिस अधीक्षक मीनू कुमारी को मामले से अवगत कराया.

पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर चित्रगुप्तनगर थाना की पुलिस देर रात मौके पर पहुंची और रेड क्रॉस भवन परिसर का मुख्य द्वार खुलवा गरीबों को एक वैकल्पिक व्यवस्था प्रदान किया. बावजूद इसके एक कंबल की चाहत में अपना घर-बार छोड़ यहां पहुंचे गरीबों को रात भर ठंड में ही ठिठुरना पड़ा.

रविवार को भले ही सोसायटी के द्वारा इन गरीबों को एक-एक कंबल मुहैया करा दिया जाये, लेकिन इस कंबल की इंतजार में बीती ठंडभरी रात और सोसायटी के भद्दे मजाक को शायद ही कोई भूल पाये. बताया जाता है कि इन गरीबों में से अधिकांश की उम्र 60 वर्ष के पार की थी.

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