खबर अंदरखाने की : प्रमुख राजनीतिक दल के एक प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष हैं गुम

खगड़िया : वैसे खबर जरा उड़ती है लेकिन यह सच्चाई के बेहद ही करीब की भी है. खबर एक प्रमुख राजनीतिक दल के अंदरखाने से उभरकर सामने आई है. खबर की स्थानीय पार्टी पदाधिकारियों ने पुष्टि नही की है इसलिए कुछ तथ्यों को हम छुपा रहे है. मामला थोड़ा हास्यास्पद भी है. बताया जाता है कि सत्ताधारी गठबंधन के एक प्रमुख घटक दल के एक प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष की खोज पार्टी के स्थानीय पदाधिकारी कर रहें हैं. ऐसी भी बात नहीं है कि उस प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष कहीं गुम हो गये हैं.

दरअसल जिले के पार्टी के वरीय पदाधिकारियों को उनके पद पर मनोनीत होने की जानकारी ही नहीं थी. मामला महिनों पूर्व का है. लेकिन अब प्रदेश कार्यालय से उनके मनोनयन की जानकारी जिले के कुछ पार्टी पदाधिकारियों को मिली है. ऐसे में उनका खोजबीन शुरू हो चुका है. मामले के कुछ दिलचस्प पहलू और भी है.

मिली जानकारी के अनुसार पार्टी के संबंधित प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष को उनके पद पर मनोनीत किये जाने की सूचना महीनों पूर्व ही उन्हें मोबाइल के माध्यम से दी गई थी और उन्हें मनोनयन पत्र लेने के लिए संबंधित प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष ने पटना बुलाया भी था. लेकिन वो ना तो पत्र लेने पटना पहुंचे और ना ही पार्टी के स्थानीय गतिविधियों में हिस्सा लिया. बात तो हद से तब गुजर गई जब उन्हें पार्टी के संबंधित प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष ने फोन कर अपना पद व नाम बताया.

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सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार संबंधित प्रकोष्ठ के नवमनोनीत जिलाध्यक्ष द्वारा जब अपने प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष को पहचानने से इंकार कर दिया गया तो प्रदेश अध्यक्ष झल्ला सा उठे थे. लेकिन महिनों बाद जिले के पार्टी पदाधिकारी उन्हें ढूंढ रहे हैं और उन्हें पद पर बने रहने के लिए मनाया जा रहा है. लेकिन वो भागे-भागे बताये जा रहें हैं. उनके भागने की भी एक अलग कहानी है. बताया जाता है कि जिस वक्त उन्हें पद पर मनोनीत किया गया था. उस वक्त स्थानीय स्तर पर पार्टी में उतनी गुटबाजी नहीं थी. लेकिन वक्त के साथ पार्टी की आंतरिक गुटबाजी के सतह पर आने से उनकी असमंजसता बढ़ गई है.

बताया जाता है कि पार्टी के जिलाध्यक्ष से उनके पुराने संबंध रहे है. दूसरी तरफ दूसरे गुट के भी कई पार्टी पदाधिकारी ना सिर्फ उनके स्वजातिय हैं बल्कि उनसे भी उनके संबंध बेहतर ही रहे है. बहरहाल संबंधित प्रकोष्ठ के एक जिलाध्यक्ष को ढूंढने और मनाने का दौर पार्टी के स्थानीय पदाधिकारी कर रहे हैं. देखना दिलचस्प होगा चूहे-बिल्ली के इस खेल में कौन कितना किसको नचाता है.