शंकरानन्द बने Youth ICON, काव्य प्रतिभा को मिली राष्ट्रव्यापी पहचान !

खगड़िया : कहा जाता है कि प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती और यह अपनी मंजिल खुद व खुद हासिल कर लेती है. हर व्यक्ति की अपनी क्षमताएं होती है. जरूरत होती है बस खुद के अंदर की छिपी क्षमताओं को तलाशने व तराशने की. जिले के टीचर्स कोलनी निवासी व जाने-माने कवि कैलाश झा ‘किंकर’ के पुत्र शंकरानंद ने कुछ ऐसी उपलब्धि हासिल की है.

युवा साहित्यकार शंकरानंद राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान कायम करने में सफल रहे हैं. साहित्य के क्षेत्र में उन्होंने जिले को गौरवान्वित किया है. उल्लेखनीय है कि साहित्य अकादमी, नई दिल्ली के द्वारा आयोजित कार्यक्रम ‘युवा साहिती’ जैसे बहुभाषी कवि सम्मेलन में हिन्दी भाषा साहित्य परिषद, खगडिया के युवा साहित्यकार शंकरानंद का चयन हुआ था. असमियां, उर्दू, मैथिली एवं हिन्दी से देश भर में चुने गये विभिन्न भाषाओं के कवियों में शंकरानंद का चयन हिंदी के एकमात्र प्रतिनिधि कवि के रूप में हुआ.


30 अगस्त को आयोजित राष्ट्रीय स्तर के कवि सम्मेलन में शंकरानंद ने अपनी काव्य प्रतिभा की अलग पहचान छोड़ी और श्रोताओं की प्रशंसा प्राप्त की. आयोजकों ने इस अवसर पर उन्हें 14 हजार रूपये का चेक प्रदान किया. इस उपलब्धि पर उन्हें कवियों व साहित्कारों द्वारा लगातार बधाइयां मिल रही हैं. गौरतलब है कि इसके पूर्व भी ‘वागर्थ कोलकता’ ने युवा साहित्यकार शंकरानंद की पहली किताब ‘दूसरे दिन के लिए’ प्रकाशित किया था. वहीं दूसरी तरफ उनकी दूसरी किताब ‘पदचाप के साथ’ पांडुलिपि प्रकाशन हेतु बिहार सरकार के राजभाषा विभाग द्वारा चयनित होने के बाद बोधि प्रकाशन,राजस्थान से प्रकाशित हुई है.