प्रकट हो गये चोरी हुए लड्डू गोपाल की मूर्ति, चोरों के चेहरे अब भी अदृश्य

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खगड़िया : वैसे तो भगवान की मूर्तियों से श्रद्धालुओं की आस्थाएं जुड़ी होती हैं और इनमें उनकी भावनाएं निहित होती है. लेकिन चोर…चोर ही होता है. उनके मन नें कैसी आस्था व कैसा विश्वास? बात विगत 23 अप्रैल की है जब जिले के चौथम थाना क्षेत्र के चौथम राज ठाकुरबाड़ी से चोरों ने राधा एवं लड्डू गोपाल की मूर्तियों की चोरी कर ली थी. मूर्ति चोरी की घटना को पुलिस से गंभीरता से लिया था और मामले की जांच के लिए पटना से दो सदस्यीय फोरेंसिंक टीम भी चौथम पहुंची थी.

दूसरी तरफ स्थानीय लोगों के बीच चर्चाओं का माहौल गर्म रहा था.वहीं मामले पर स्थानीय लोगों के बीच आक्रोश भी था. लेकिन फांरेंसिंक टीम व स्थानीय पुलिस चोरों तक पहुंचती इसके पूर्व ही दोनों मूर्तियां एक-एक कर लावारिस हालत में बरामद कर ली गई. उल्लेखनीय है कि बीते 17 मई को कैथी के बदला-नगरपाड़ा बांध पर बोरे में बंद कोई चीज लावारिस अवस्था में देखी गई थी. जब स्थानीय लोगों ने कौतूहलता में उसे खोला था तो उसमें चोरी गई राधा की मूर्ति मिला था. हलांकि राधा की मूर्ति का एक हाथ गायब था.

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दूसरी तरफ बुधवार को लडडू गोपाल की मूर्ति भी लावारिस हालत में मिला है.मिली जानकारी के अनुसार जय प्रभानगर के एक बगीचे में ग्रीस की एक बाल्टी में छिपाकर रखे गये लड्डू गोपाल की मूर्ति पर जब स्थानीय लोगों की नजर पड़ी तो इसकी सूचना पुलिस को दी गई. सूचना मिलते ही मौके पर पुलिस पहुंची और मूर्ति को बरामद कर लिया गया. बताया जाता है कि ठाकुरबाड़ी के पुजारी ने मूर्ति की पहचान कर ली है और उसे पिछले माह ठाकुरबाड़ी से चोरी गई लड्डू गोपाल का ही मूर्ति बताया है.

ऐसे में अब कोर्ट की कानूनी प्रक्रिया के बाद बरामद की गई मूर्ति को ठाकुरबाड़ी को सौंप दिया जायेगा. दूसरी तरफ उस रात ही चोरी गई मुकुट को अभी तक बरामद नहीं किया जा सका है. वहीं एक स्वर्ण व्यवसायी के घर के आस-पास से मूर्ति की बरामदगी से क्षेत्र में कई अन्य तरह की चर्चाएं भी है.

हालांकि ठाकुरबाड़ी से चोरी गई दोनों ही मूर्तियों को लावारिस अवस्था में ही सही एक माह के अंदर ही बरामद कर लिया गया है. लेकिन मूर्ति चोरी का रहस्य और चोरों के उद्देश्य जैसे सवाल आज भी अपनी जगह कायम हैं. साथ ही चोरों के चेहरे भी अबतक सामने नहीं आ पायें हैं.

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