नन्हीं नृत्यांगना ‘सरस्वती’ महायज्ञ में मचा रही है धूम

खगड़िया (मुकेश कुमार मिश्र) : जिले के गोगरी प्रखंड के समसपुर में आयोजित हो रहे 9 दिवसीय श्री विष्णु यज्ञ सह श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान महायज्ञ में सोमवार को ऩन्हीं नृत्यांगना के घुंघरूओं की झनक ने उपस्थित लोगों का मन मोह लिया. कहा जाता है कि प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती. प्रतिभाएं नैसर्गिक होती हैं. कुछ ऐसी ही प्रतिभा की धनी 9 वर्षीय बाल नृत्यांगना सरस्वती ने कार्यक्रम में कुचिपुड़ी नृत्य पेश कर धूम मचा दिया. मिली जानकारी के अनुसार सरस्वती अन्तर्राष्ट्रीय नृत्य समागम में भी भाग ले चुकी है जहां उन्होंने आंध्रप्रदेश के कलाकारों के साथ प्रसिद्ध नृत्य शैली ‘कुचिपुडी’ समूह में प्रस्तुत कर गिनीज वर्ल्ड रिकार्ड में अपना नाम दर्ज कराया है.

25 दिसंबर को विजयवाड़ा के आइजीएमसी स्टेडियम में 6,117 नर्तकों व नर्तकियों के समूह ने इस नृत्य शैली में एक साथ प्रस्तुति देकर रिकार्ड में अपने समूह का नाम दर्ज कराया था. अंतरराष्ट्रीय ‘कुचिपुडी’ नृत्य समागम में 12 मिनट की प्रस्तुति के दौरान यह नया विश्व रिकार्ड बना था.

नन्हीं नृत्यांगना ‘सरस्वती’

उल्लेखनीय है कि सरस्वती श्री शिव शक्ति योग पीठ नवगछिया परिवार से जुड़ी हुई हैं तथा बताया जाता है कि उन्हें परमहंस स्वामी आगमानंद जी महाराज का आशीर्वाद प्राप्त है. पांचवी कक्षा में पढने वाली नृत्यांगना सरस्वती अंग एवं कोसी की धरती पर कई मौकों पर अपनी नृत्य कला से लोगों का मन मोह चुकी है.

नन्हीं नृत्यांगना ‘सरस्वती’

नन्हीं नृत्यांगना सरस्वती की माँ लक्ष्मी बताती हैं कि अंतर्राष्ट्रीय कुचिपुडी नृत्य प्रतियोगिता में 23 राज्यों के छह हजार से अधिक नृत्यांगनाओं ने भाग लिया था. जिसमें जूनियर नृत्यांगना के रुप में सरस्वती को प्रथम स्थान मिला था. उस वक्त छोटी उम्र में सरस्वती के बेहतरीन नृत्य को देखकर गिनीज के प्रतिनिधियों ने उन्हें अलग से एक प्रमाण—पत्र देने की घोषणा किया था.

श्री विष्णु यज्ञ सह श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान महायज्ञ

गौरतलब है कि श्री शिव शक्ति योग पीठ नवगछिया से जु़ड़ा सरस्वती का परिवार भारतीय संस्कृति को सहजने में लगे हुए हैं और विभिन्न विधाओं में ज्ञान प्राप्त कर रहा है. कहा जाता है कि परमहंस स्वामी आगमानंद जी महाराज का आशीर्वाद इन परिवार के उपर रहा है. भागलपुर जिले के तुलसीपुर जमुनियां निवासी 45 वर्षीय योगाचार्य गुड्डु जी 20 वर्ष पूर्व रोजगार पाने के लिए घर से आन्ध्र प्रदेश चले गए और वहां प्रकाशम जिले के अंगोल शहर में रहने लगे जहां एक कम्पनी में उन्हें काम भी मिला लेकिन काम के बोझ ने उन्हें शारीरिक रूप से कमजोर कर दिया.

वीडियो देखिये, कितना जरुरी है #बिहार के विश्वविद्यालयों के छात्र चुनाव, बता रहे हैं #शिवानंदतिवारी . 1970 में पटना यूनिवर्सिटी के छात्र चुनाव में #लालूप्रसाद के कंपेन और बाद में उनके राजनीतिक उभार की कहानी….

जिसके बाद वो योग गुरु बाबा राम देव के पतंजलि संस्था में शामिल हो गए और वहां वे काफी मेहनत व लगान के साथ योग विद्या प्राप्त किया. इस बीच उन्होंने आन्ध्र प्रदेश में ही शादी रचाई और उन्हें एक पुत्री रत्न की प्राप्ति हुई. बताया जाता है कि सरस्वती छह माह की आयु में ही ओम् शब्द का उच्चारण करने लगी थी. जिसके कारण ही उसका नाम ‘सरस्वती’ रखा गया.

खगड़िया : आरोग्य भारती के सम्मेलन में प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति पर दिया गया बल

वही सरस्वती आज नौ वर्ष की उम्र में नृत्य के क्षेत्र में एक अलग पहचान बना चुकी है. सरस्वती आन्ध्र प्रदेश के भारत नाट्य कला परिषद अंगोल से भी जुड़ी हुई है. बहरहाल आज उनके पिता योग के क्षेत्र में ओर वो खुद नृत्य के क्षेत्र में एक अलग पहचान बनाकर भारतीय संस्कृति को सहजने में लगे हुए हैं.

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*