किशगनंज : अब ऑर्गेनिक मखाना की खेती करेंगे बिहार के किसान

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ऑर्गेनिक मखाना की खेती करेंगे बिहार के किसान

किशगनंज: मखाना की पहचान पानी की सतह पर फैले कांटेदार बड़े आकर के गोलाकार पत्र एवं आकर्षक फूलों से की जाती है. देश में मखाना उत्पादन का कुल 80 से 90 प्रतिशत उत्पादन बिहार में होता है. मखाने का उत्पादन उत्तरी बिहार के कुछ जिलों में बहुतायत रूप से होता है. इसकी मांग देश और विदेशों में काफी है. इसका उत्पादन तालाबों और सरोवरों में ही होता है. ऑर्गेनिक मखाना उत्पाद की विदेशों में दिनों दिन मांग बढ़ रही है. कीमत भी पारंपरिक मखाना से कम से कम पांच गुणा अधिक मिल रही है. यही वजह है कि अब बिहार के किसानों को ऑर्गेनिक मखाना के उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है.

कोसी इलाके से इसकी शुरूआत की जाएगी. इसके लिए भोला पासवान शास्त्री कृषि कॉलेज के मखाना वैज्ञानिकों की टीम द्वारा तैयार किए गए प्रोजेक्ट के तहत नियाम के द्वारा जिलेवार किसानों को प्रशिक्षित कर कार्ययोजना तैयार की जा रही है.

ऑगेर्निक मखाना उत्पाद के लिए किसानों को बकायदा प्रशिक्षण देकर उत्पाद को बाजार मुहैया कराने व मार्केटिंग के गुर भी सिखाए जा रहे हैं. बीते दिनों पूर्णिया, सहरसा, मधेपुरा, सुपौल में प्रशिक्षण दिया जा चुका है, आगामी 23 फरवरी को किशनगंज में दी जाएगी. प्रशिक्षण शिविर में मखाना वैज्ञानिकों की टीम के साथ नियाम के निदेशक डॉ. हेमा यादव भी शामिल होंगे.

दरअसल ऑर्गेनिक मखाना में सामान्य मखाना से बहुत ज्यादा मात्रा में न्यूट्रीशंस पाए जाते हैं. इस वजह से यूके, यूएस, कनाडा व अरब देशों में इसकी मांग अधिक है. इसके उत्पादन में लागत बराबर ही आता है लेकिन उत्पादन क्षमता बराबर या थोड़ी कम होती है. लेकिन खास बात यह है कि किसानों को उत्पाद की कीमत पारंपरिक मखाना से कम से कम पांच गुणा अधिक मिलेगी. इसके उत्पादन में किसी भी प्रकार के रसायनिक खादों के प्रयोग के बदले नीमयुक्त व वर्मी कंपोस्ट का प्रयोग किया जाएगा.

यही वजह है कि देश के उत्पादन का 60 फीसद मखाना देने वाला बिहार के कोसी इलाके में इसके उत्पादन पर जोर दिया जा रहा है. ताकि विदेशी पूंजी निवेश का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचाया जा सके. लिहाजा बीपीएस कृषि कॉलेज पूर्णिया के द्वारा बनाए गए इस प्रोजेक्ट को आकार देने में राष्ट्रीय कृषि विपणन संस्थान(नियाम) जयपुर रुचि ले रही है. किसानों को उसके उत्पाद को बाजार मुहैया कराने यानी ब्रांडिंग से मार्केटिंग तक का जिम्मा नियाम ने लिया है.

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