उम्मीदों से भरा है नया साल, एजुकेशन हब के रूप में अब किशनगंज हो रहा विकसित

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उच्च शिक्षा को मिलेगा मुकाम

किशनगंज: साक्षरता का मतलब है पढऩे लिखने की योग्यता. दूसरे संसाधनों की तरह साक्षरता भी आज हमारे जीवन की सबसे बड़ी जरूरतों में से एक है. साक्षरता सिर्फ हमारे खुद के विकास तक सिमित नहीं है. इसका गहरा सम्बन्ध सामाजिक और आर्थिक विकास से भी है. साक्षरता दर में देश के सबसे पिछड़े इलाके में शुमार किशनगंज जिला अब एजुकेशन हब के रूप में विकसित हो रहा है. खासकर उच्च शिक्षा के क्षेत्र में किशनगंज अब अपना मुकाम हासिल करने की ओर अग्रसर है. माता गुजरी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज से शुरू हुआ सफर काफी आगे बढ़ चुका है. अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का सेंटर, डॉ. कलाम कृषि कॉलेज समेत एमआइटी व अजमत इंजीनियरिंग कॉलेज जैसे कई निजी संस्थानों ने भी संभावनों को पंख दिया है.

तकनीकी व व्यवसायिक शिक्षा पर जोर

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल डॉ. कलाम कृषि कॉलेज में राज्य सरकार ने बकायदा रेशम अनुसंधान केंद्र खोले जाने की घोषणा की है. हाल ही में कैबिनेट की बैठक में इसके लिए 60 करोड़ का बजट भी दिया गया है. उम्मीद है जल्द ही यह योजना धरातल पर उतरेगी. इसके अलावा एएमयू सेंटर में पूर्व से संचालित बीएड व एमबीएम कोर्स के अलावा लगभग दर्जन भर प्रोफेशनल व वोकेशनल कोर्स नए साल में शूरू की जाएगी. कृषि कॉलेज में छात्रों की पढ़ाई के साथ-साथ किसानों को आवासीय प्रशिक्षण की सुविधा दी जाएगी. खास बात यह कि पूर्णिया में विश्चविद्यालय बनने के बाद किशनगंज जिले के छात्रों का उच्च शिक्षा के प्रति रूझान भी बढ़ेगा.

जिले में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में मील का पत्थर बनीं माता गुजरी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज में अब पीजी के साथ-साथ नर्सिग की पढ़ाई भी शुरू हो गई है. वहीं किराये के भवन में चल रहे अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की शाखा को चकला में अपना भवन भी उपलब्ध होने की प्रबल संभावना है. आरके साहा महिला कॉलेज में कला, विज्ञान और वाणिज्य की पढ़ाई शुरू होने से महिलाएं भी उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अग्रसर होने होने लगी हैं.

इंटर स्तरीय उच्च विद्यालय डे मार्केट में इलेक्ट्रॉनिक्स, फूड प्रिजर्वेशन, एकाउंटेंसी और ऑडिटिंग की पढ़ाई शुरू की गई है. बेरोजगार युवक-युवतियों को तकनीकी शिक्षा से जोड़ने के लिए अस्परा स्कील सेंटर काम रही है. यहां प्रधानमंत्री कौशल विकास कार्यक्रम के माध्यम से तकनीकी क्षेत्र में प्रशिक्षण देकर युवाओं को रोजगार से जोड़ा जा रहा है. प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवाओं को निजी कंपनियों में प्लेसमेंट भी करवाया जा रहा है.

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