अपने ही घर में बेगाने हुए श्री बाबू, जयंती पर नहीं ली सुध जिला परिषद अध्यक्ष ने

सुनील जख्मी, मुंगेर: बिहार केसरी श्रीकृष्ण सिंह का 131 वीं जयंती रविवार को सभी जगह मनाई गई. लेकिन जिस जिला परिषद के उपाध्यक्ष व अध्यक्ष पद पर 4 साल तक रहे उसी ने इन्हें भुला दिया. जिलापरिषद परिसर में इनकी प्रतिमा धूल फांकते नजर आई. बिहार निर्माता के नाम से प्रसिद्ध श्री कृष्ण बाबू मुंगेर जिला परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पर को सुशोभित किये थे. जयंती पर श्री कृष्ण बाबू अपने घर में ही बेगाने हो गए. उनकी जयंती के अवसर पर जिला परिषद परिसर में स्थापित उनके आदमकद प्रतिमा पर एक अदद माल्यार्पण करना भी माननीयों ने उचित नहीं समझा.

श्री बाबू को अपनों ने ही भुला दिया. वे अपने घर में ही बेगाने हो गए. श्री कृष्ण सिंह का जन्म तत्कालीन मुंगेर वर्तमान शेखपुरा नवादा माउर के सभ्रांत किसान परिवार हरिहर सिंह के चौथे पुत्र के रूप में 21 अक्टूबर 1887 में हुआ था. 1937 में बिहार के पहले मुख्यमंत्री बने. 1924 ई० में मुंगेर जिला परिषद के चुनाव में उन्हें सर्व सम्मति से अध्यक्ष मान लिया गया. किन्तु उन्होंने अपने अग्रज शाह मुहम्मद जुबैर, जो एक प्रतिष्ठित वकील थे, को अध्यक्ष बना कर खुद उपाध्यक्ष बने. 1930 ई० में जुबैर साहब की मृत्यु के पश्चात् ही इन्होंने अध्यक्ष पद स्वीकार किया. मुंगेर जिला प्रशासन ने श्री बाबू के सम्मान में जिला परिषद सभागार में भव्य समारोह आयोजन कर इनका आदम कद प्रतिमा लगवाया था.

उस समय बिहार के कई मंत्री ने आकर प्रतिमा का अनावरण किया. आज बानगी देखिए बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री व जिला परिषद के अध्यक्ष पद को सुशोभित करने वाले बिहार केसरी की जयंती मनाना ही जिला परिषद से जुड़े अधिकारी और जिला परिषद अध्यक्ष भूल गए. रविवार को देर शाम तक इनके आदम कद प्रतिमा पर एक टूटी माला ही सुशोभित होते रहा. चुनाव के समय लोग इनके नाम से चुनाव जीत जाते हैं और बाद में इन्हें भूल जाते हैं.

मुंगेर से ही श्री बाबू कई यादें

हवेली खड़गपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए और बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री बने. 1916 में कॉलेज की पढ़ाई पूरा कर मुंगेर वकालत खाना में ही वकालत शुरू किया. इन्हें डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद तथा अनुग्रह नारायण सिंहा के आधुनिक बिहार के निर्माता भी कहा जाता है.

एक हाथ में गीता और दूसरे हाथ में कृपाण रख देश की आजादी की कसम खाई थी

आजादी के लिए छात्र जीवन में ही मुंगेर के कष्टहरणी घाट पर, एक हाथ में गीता और दूसरे हाथ में कृपाण लेकर श्री बाबू ने संकल्प लिया था कि “जब तक देश आजाद नहीं हो जायेगा, तब तक चैन से नहीं बैठूँगा”. उन्होंने कहा था स्वराज्य मानकर नहीं छीन कर लिया जाता है. 1923 ई० में खड़गपुर में उन्होंने बिहार के जमींदारों द्वारा किसानों पर किये जाने वाले जुल्म के खिलाफ किसानों को संगठित किया;. उस वक्त श्री बाबू किसान सभा के सचिव थे. किसानों की ओर से सिंहेश्वर चौधरी ने उन्हें ‘बिहार केसरी’ की उपाधि से विभूषित किया.

सरकारी बाबुओं ने भी भुला दिया

बोले अध्यक्ष

जिला परिषद अध्यक्ष रामचरित्र मंडल ने बताया कि दुर्गा पूजा विसर्जन का माहौल है, हमें याद नहीं रहा कि आज ही उनकी जयंती है. इसलिए हम माल्यार्पण नहीं कर पाए.

डीडीसी ने नहीं दिया जवाब

वहीं इस संबंध में जिला परिषद कार्यपालक पदाधिकारी सह डीडीसी रामेश्वर पांडे से संवाददाता ने फोन कर इस संबंध में जानकारी मांगी तो उन्होंने मोबाइल रिसीव नहीं किया.

बोले पूर्व जिपअध्यक्ष

पूर्व जिप अध्यक्ष पिंकी देवी ने कहा कि जिप के कार्यपालक पदाधिकारी रामेश्वर पांडे एवं जिप अध्यक्ष जानबूझ कर श्री बाबू का अपमान किये हैं. कार्रवाई के लिए विभाग को लिखेंगे. उन्होंने वर्तमान सदन में अध्यक्ष पैसे के बल पर कुर्सी तो हासिल कर लिए लेकिन इसके टीम में कोई जानकर नहीं है. सभी भ्रष्टाचार करने पर तुले हैं. महापुरूष क्या होते है इन जाहिलों को पता नहीं. ये लोग सम्मान देना तो दूर की बात औपचारिकता भी निभाना नहीं जानते.

बोली सांसद

सांसद वीणा देवी श्री बाबू की जयंती पर जिप अध्यक्ष व जिप के कार्यपालक पदाधिकारी सह डीडीसी पर नाराजगी जताते हुए इन लोगों की कार्यशैली लापरवाह है. कार्रवाई के लिए विभाग से मांग करेगी. इसके लिए वे स्वयं पहल करेगी. उन्होंने इस सच को सामने लाने के लिए लाइव सिटीज को धन्यवाद भी दिया.

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