धरहरा पीएचसी बना रेफर अस्पताल

धरहरा/मुंगेर: प्रखंड मुख्यालय स्थित धरहरा पीएचसी में चिकित्सा व्यवस्था चरमरा गई है। प्रखंड वासियों को उचित चिकित्सा व्यवस्था मुहैया कराने के उद्देश्य से सन् 1970 में धरहरा दक्षिण पंचायत के पूर्व मुखिया स्व0 उपेन्द्र नारायण सिंह के द्वारा दान में दी गई जमीन पर बना प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र बदहाल है।

यहां पर पद स्थापित प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डाॅ0 महेन्द्र कुमार सहित अन्य चिकित्सा पदाधिकारियों व कई स्वास्थ्य कर्मियों के मनमानी के चलते मरीज़ों का उचित ईलाज नहीं हो पा रहा है। यहां पदाधिकारियों व कुछ कर्मियों का प्रतिदिन 12 बजे आना लेट नहीं व 2 बजे भेट नहीं की स्थिति कायम है। शनिवार को नक्सल प्रभावित बंगलवा पंचायत के कोठवा गांव के भोला कोड़ा के डायरिया ग्रसित 12 वर्षीय पुत्र मिथुन कुमार का उचित ईलाज नहीं होने से स्थिति नाजुक बनी हुई है। यहां ईलाज के लिए आने वाले मरीजों को सिर्फ रेफर कर चिकित्सा की खाना पूर्ति हो रही है।

घटवारी से पहुंचे कार्तिक साव सहित कई अन्य मरीजों को ईलाज के लिए बाहर से दवा खरीदनी पड़ी। स्थानीय ग्रामीण सह भाजयुमों प्रखंड अध्यक्ष शंकर सिंह उर्फ कैलू जी सहित कई अन्य मरीजों ने भी बताया कि कुछ स्थानीय लोग ईलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों को बाहर के दुकान से दवा खरीद एवं जांच घर में जांच करवाने के एवज में कमीशन वसूली करते है।सिंह ने कहा कि प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी के सांठ-गांठ से बाहरी लोग अस्पताल में पहुंचकर मरीजों को सलाईन भी चढ़ाते है। इस स्थिति में मरीज कभी भी काल के गाल में समा सकते है। उन्होेंने कहा कि इसकी शिकायत शिविल सर्जन मुंगेर से भी की थी। लेकिन उचित करवाई नहीं होने से यहां की स्थिति भयावह हो गई है।

अस्पताल में कई एएनएम प्रसव कराने वाली महिलाओं से भी जब तक अवैध रकम की वसूली नहीं करती हैं तब तक ईलाज नहीं करती है। प्रखंड अध्यक्ष ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि दो दिनों के अन्दर अस्पताल में व्याप्त कू-व्यवस्था को दूर नहीं किया जाय अन्यथा  भाजयुमों चरण बद्ध आन्दोलन चलाएगी। वहीं इस सबंध में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डाॅ0 महेन्द्र कुमार ने अपने उपर लगाए गए आरोप को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यहां सैकड़ों मरीजों का सही ढंग से ईलाज किया जाता है। अस्पताल की व्यवस्था ठीक है।

 

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