नालंदा में मनाई गई डॉ भीमराव अंबेडकर की 128वीं जयंती, उनके बताए मार्ग पर चलने का लिया संकल्प

भारत रत्न बाबा साहेब डॉ भीमराव अम्बेडकर की 128वीं जयंती पर अनुसूचित जाति/जनजाति कर्मचारी संघ की ओर से विविध कार्यक्रम आयोजित किये गये

लाइव सिटीज, नालंदा(संतोष कुमार): बिहारशरीफ शहर देवीसराय में आज विश्वविभूति, महामानव, बोधिसत्व, भारत के मसीहा, संविधान निर्माता, सिम्बल ऑफ नॉलेज, भारत रत्न बाबा साहेब डॉ भीमराव अम्बेडकर की 128वीं जयंती पर अनुसूचित जाति/जनजाति कर्मचारी संघ की ओर से विविध कार्यक्रम आयोजित किये गये. जिसकी अध्यक्षता अनुसूचित जाति/जनजाति कर्मचारी संघ के जिला उपाध्यक्ष भोला पासवान ने किया.

अध्यक्षीय सम्बोधन में भोला पासवान ने जिलेवासियों व सभी सदस्यों को अपनी शुभकामनाएं दी. मुख्य कार्यक्रम अम्बेडकर चौराहा स्थित उनकी प्रतिमा स्थल पर हुआ. अनुसूचित जाति/जनजाति कर्मचारी संघ ने बाबा साहेब के प्रतिमा पर माल्यापर्ण व पुष्पांजलि अर्पित की तथा मोमबत्ती प्रज्जवलित कर उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प दोहराया.

अनुसूचित जाति/जनजाति कर्मचारी संघ के तत्वावधान में श्रम कल्याण केंद्र के मैदान से प्रातः अम्बेडकर चौराहा तक पैदल शांति-मार्च नाला-रोड़ होते हुए अम्बेडकर चौक तक निकाला. इसमें पैदल मार्च में बाबा साहेब के नारों को लगाते हुए शांतिपूर्ण सैकड़ों लोगों ने शिरकत की. अम्बेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते हुए अपने सम्बोधन में महासचिव हरेन्द्र चौधरी ने कहा कि आज पूरे देश में सामाजिक सद्भावना दिवस मनाया जा रहा है. उन्होंने नालंदावासियों को अपनी शुभकामनाएं दी है.

कार्यक्रम का संचालन करते हुए महासचिव हरेन्द्र चौधरी ने अपने उद्बोधन में कहा कि 20वीं शताब्दी के श्रेष्ठ चिन्तक, ओजस्वी लेखक, तथा यशस्वी वक्ता एवं स्वतंत्र भारत के प्रथम कानून मंत्री डॉ भीमराव अम्बेडकर भारतीय संविधान के प्रमुख निर्माणकर्ता हैं. विधि विशेषज्ञ, अथक परिश्रमी एवं उत्कृष्ट कौशल के धनी व उदारवादी, व्यक्ति के रूप में डॉ आंबेडकर ने संविधान के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया था.

डॉ भीमराव एक भारतीय विधिवेत्ता होने के साथ ही बहुजन राजनीतिक नेता और एक बौद्ध पुनरुत्थानवादी भी थे. बाबा साहब एक अछूत और मजदूर का जीवन जी कर देख चुके थे, वे कुली का भी काम किए तथा कुलियों के साथ रहे भी थे. उन्होंने भारतीय गांव को वर्णव्यवस्था का प्रयोगशाला कहा था. इस मौके पर उन्होंने घोषणा किया की “सुपर 30” की तर्ज पर मोगलकुआँ में ओबीसी के छात्र/छात्राओं को मुफ्त में शिक्षा देकर बाबा साहेब के सपना को साकार करेंगे.

इस अवसर पर अनुसूचित जाति/जनजाति कर्मचारी संघ के मीडिया प्रभारी शिक्षक नेता राकेश बिहारी शर्मा ने अपने सम्बोधन में कहा कि युगपुरूष, विश्व भूषण, भारत रत्न भीमराव अम्बेडकर जी के नाम से लोकप्रिय, भारतीय संविधान के मुख्य शिल्पकार, भारतीय विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री, राजनीतिज्ञ और महान समाज सुधारक थे. डा. भीमराव अम्बेड़कर ने संत गाडगे बाबा, महात्मा फूले और संत कबीर की शिक्षा संबंधी सोच को परिवर्तन की राजनीति के केन्द्र में रखकर संघर्ष किया था.

वे सामाजिक परिवर्तन के ध्वज बाहक थे. डा. अम्बेड़कर ने महात्मा फूले और संत कबीर द्वारा कुरीतियों के खिलाफ शुरू किए गए आन्दोलन को विश्वव्यापी बनाया और श्रमिक अधिकारों के रक्षक तथा श्रमिकों के लिए सुरक्षा कवच थे बाबा साहेब अम्बेडकर. बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर के बताये हुए मार्ग पर चलकर ही हम समाज में व्याप्त कुरीतियों को समाप्त कर राष्ट्र को मजबूत बना सकते है.

 

बिहार अराजपत्रित प्रारम्भिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष संजय कुमार सिन्हा ने कहा कि बाबा आंबेडकर की सामाजिक एवं आर्थिक सिद्दांत आजाद भारत के लिए आज भी प्रासंगिक है. उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत के संविधान निर्माता मानवता के मसीहा समाज सुधारक डॉ भीम राव अम्बेडकर एक राष्ट्रीय नेता थे. वह उच्चवर्गीय मानसिकता को चुनौती देते हुए निम्नवर्ग के लिए ऐसे महान कार्य किये जिसके कारण सारे भारतीय समाज में वेश्रद्धेय है.

मौके पर नालन्दा जिला अनुसूचित जाति/जनजाति कर्मचारी संघ के उपाध्यक्ष रमेश पासवान, कृष्णदेव चौधरी, धीरज कुमार, शिवालक पासवान, रंजीत कुमार, रंजीत पासवान, कमेशर पासवान, अवधेश चौधरी, उपेन्द्र कुमार, अनिल पासवान, सत्येन्द्र भारती, शंभू पासवान, अजित कुमार, संतोष कुमार, रजनीश पासवान, नागेश्वर चौधरी, राजकुमार पासवान,जयप्रकाश, योगेन्द्र कुमार मस्ताना समेत तमाम शिक्षक, कर्मचारी नेता भी मौजूद रहे.

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