हड़ताल के कारण ग्रामीण बैंकों में लटके रहे ताले, कामकाज रहा ठप

नवादा: जिले के मध्य बिहार ग्रामीण बैंकों के 58 शाखाओं के ताले शुक्रवार को नहीं खुले. अखिल भारतीय ग्रामीण बैंक एसोसिएशन के आह्वान पर इससे जुड़े अधिकारियों व कर्मचारियों ने एक दिवसीय हड़ताल में भाग लेकर अपनी एकजुटता का परिचय दिया. बैंकों में हड़ताल रहने से ग्राहकों को परेशानी का सामना करना पड़ा.


अपने संबोधन में जिला संयोजक सुरेन्द्र कुमार ने कहा कि भारत सरकार की मंशा स्पष्ट नहीं है. नियुक्ति नियमावली में असमानता के साथ ही भत्तों व पेंशन में असमानता सरकार की दोरंगी नीति का परिचायक है. ग्रामीण बैंकों के निजीकरण का विरोध यूनियन हमेशा करती रही है और आगे भी करती रहेगी. हमारे यूनियन प्रतिनिधि को अब तक बोर्ड में प्रतिनिधित्व तक नहीं दिया गया. अनुकंपा का लाभ तक नहीं दिया जा रहा है. नोटबंदी के क्रम में काॅमर्शियल बैंक के समान अब तक भत्ते का भुगतान तक नहीं किया जा रहा है.


उन्होंने कहा कि ग्रामीण बैंको ने जन—धन योजना से लेकर अटल पेंशन योजना में महत्वपूर्ण योगदान दिया. जीविका की ग्रामीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका रही है. बावजूद हम सरकारी उपेक्षा के शिकार हो रहे हैं. यहां तक कि कंप्यूटर भत्ता देने के बाद भी इसे रोक दिया गया. हड़ताली कर्मियों को अन्य लोगों के अलावा विनोद कुमार सिंह, मोतोश कुमार, कैलाश प्रसाद, कुमार अभिषेक आदि ने संबोधित किया.

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