प्रकृति की मार झेल रहा मगही पान, ठंड से प्रभावित हो रही खेती

नवादा (पंकज कुमार सिन्हा) : पान जिसका नाम आते ही लोगों के मन मे मिठास और लालिमा की अनुभूति होती है. मगर यही पान आज प्रकृति की मार झेल रहा है. कड़ाके की ठंड के कारण पान की फसल बुरी तरह से प्रभावित हुआ है. जो पान लोगों के मुंह को लाल करती है वही पान कृषक के चेहरे को पीला कर दिया है. दिसम्बर 2017 के समाप्त होने पर जब जिले में ठंड और शीतलहर का प्रकोप बढ़ रहा था उसी समय पान की खेती को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ. यूं तो लोग बनारस के पान का खूब जिक्र करते है. मगर नवादा में मगही पान की सबसे अच्छी फसल यही उपजाई जाती है.

यहां की मगही पान देश के विभिन्न हिस्सों में भेजा जाता है. इसी कारण जिले के पान किसान इसी की खेती पर सालों भर अपनी जीविका चलाते है. मगर मगही पान के कृषक इस बार पिले पड़ गए है. जिले के पकरीबरावां, हिसुआ, रोह में इस बार पान की खेती पर बृहद पैमाने पर नुकशान पहुँचा है. किसान बुरी तरह से कर्ज में दबे हुए है.

पान की फसल बर्बाद होने पर इसका असर पान की थोक मंडी पर भी हुआ है. जहां इसके अच्छे पैदावार पर मंडी में रोजाना लाखो की बिक्री होती थी, वहीं आजकल 10 से 15 हज़ार का भी कारोबार नहीं हो पा रहा है. थोक विक्रेता बताते है कि यहां की पान रोजाना ट्रेन से बनारस के लिए जाता था मगर इस बार बहुत कमजोर पान की खेती हुई जिसके कारण पान 5 घंटे का भी सफर तय नही कर पा रहा है.

कुछ व्यापारी जो पान लेकर बाहर जाते है वो रास्ते मे ही सड़ जा रहा है. यही कारण बाहर के व्यापारी भी अभी नही आ रहे है. किसानों को अपनी जीविका चलाने के लिए भी सोचना पड़ रहा है. किसानों की यह मांग है कि सरकार उनके लिए कुछ अनुदान दे देती तो अगले साल खेती के लिए कुछ सोचा जाता. मगर इस बार की पैदावार किसानों को खेती करने के लिए सोचने पर मजबूर कर रही है.

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