ककोलत जलप्रपात तक पहुंचने वाली सीढ़ियों में रेलिंग नहीं, हो सकता है बड़ा हादसा

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नवादा (रवीन्द्र नाथ भैया) : सूबे का कश्मीर माने जाने वाले जिले के ऐतिहासिक शीतल जलप्रपात ककोलत की वादियां गर्मी के इस मौसम में सैलानियों को बरबस अपनी ओर आकर्षित कर रही है. करीब 150 फीट उपर से निरंतर गिरते शीतल जल में तपिश मिटाने की अदभूत शक्ति है. इन दिनों प्रतिदिन हजारों की संख्यां मे सैलानी अपने परिवार के साथ पिकनिक मनाने पहुंच रहे हैं.

शीतल जल में घंटों स्नान कर अपने हाथों से बनाये लजीज व्यंजन का आनन्द उठा रहे हैं लेकिन इन सारे आनन्द का एक डरावना साया जलप्रपात तक पहुंचने वाली सीढ़ियां है. एक ओर 50 फीट ऊपर से लटकती चट्टानें तो दूसरी ओर नीचे 100 से 200 फीट तक की गहरी खाई. इन सबों के बीच आये सैलानियों का रेलमपेल. ऐसे में कोई बड़ी अनहोनी घटना का गवाह ककोलत बन जाए तो कोई आश्चर्य नहीं.


चढ़नी होती है 192 सीढ़ियां –

जलप्रपात तक पहुंचने के लिये 192 सीढ़ियां चढ़नी होती है. इनमें से 50 से 60 सीढ़ियों का सफर बेहद खतरनाक हैं. सीढ़ियों के एक ओर ऊपर से लटकता चट्टान तो दूसरी ओर नीचे काफी गहरी खाई, हमेशा मौत को आमंत्रण देता है. वर्ष 2008 में भयंकर भूस्खलन के कारण पुरानी सीढ़ियां ध्वस्त हो गयी थी. उसके बाद वर्ष 2016 में वन विभाग द्वारा नयी सीढ़ियों का निर्माण कराया गया है. सीढ़ियों के निर्माण पर करीब एक कराड़ रूपये खर्च किये जा चुके हैं. इन सबों के बावजूद सीढ़ियों की सुरक्षा के लिये रेलिंग का निर्माण नहीं कराया गया है. ऐसे में जलप्रपात तक आने जाने वालों की सांसें अटकी रहती है.

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हर कोई सुरक्षा को ले रहता है चिंतित –

जलप्रपात पर सुरक्षा के नामपर प्रशासन की ओर से कोई व्यवस्था नहीं है. ककोलत विकास परिषद से जुड़े कार्यकर्ता अपनी ओर से जितना बन पा रहा है आने वाले सैलानियों के लिये उतना कर रहे हैं, लेकिन उसे पर्याप्त नहीं कहा जा सकता. थोड़ी सी चूक के बाद कितना बड़ा हादसा हो सकता है इसका अंदाजा शासन प्रशासन को नहीं है.

बाढ़ आयी तो हो सकती है बड़ी घटना –

बरसात की शुरूआत होने वाली है. एक दिन की हल्की बरसात से आयी बाढ़ ने सैलाननियों को मुश्किल में डाला है. विकास परिषद की तत्परता से किसी प्रकार की घटना नहीं हुई. लेकिन अगर घंटों बारिश हुई तो क्या होगा ? वर्ष 2014 की आयी बाढ़ में सैलानियों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिये एनडीआरएफ की टीम को पटना से बुलाना पड़ा था. तब कई सैलानी बाढ़ की पानी में बहते-बहते बचे थे तो ककोलत विकास परिषद के सदस्यों ने कई को पानी में डूबने से बचाया था.

रेलिंग का निर्माण है आवश्यक –

केयर टेकर ष्मुना पासवान कहते हैं इन दिनों सतुआनी मेला व ककोलत महोत्सव से भी अधिक भीड़ प्रतिदिन पहुंच रही है. सीढ़ियों पर रेलिंग नहीं होने से हमेशा खतरा बना रहता है. वैसे आने वालों के लिये खतरे वाले स्थानों पर लाल धागा लगा संकेत किया गया है. बावजूद खतरे व अनहोनी को टाल पाना मुश्किल है. वाॅलेंटियर आने वालों का ख्याल रख रहे हैं.

अधिकारियों ने लिया है जायजा-

समाहर्ता मनोज कुमार ने एसपी विकास वर्मन व रजौली एसडीएम शंभुनाथ पांडेय के साथ ककोलत का जायजा लिया है लेकिन सुरक्षा के नामपर अब तक कहीं कुछ किया गया हों इसका आभास तक किसी को नहीं हो पा रहा है.

कहते हैं अधिकारी – पहले चरण में सीढ़ियों का निर्माण कराया गया है. अगले चरण में रेलिंग के साथ टाइल्स लगायें जाने की योजना है. प्राक्कलन तैयार कराया जा रहा है. जल्द ही कार्य आरंभ कराया जाएगा. जहां तक सुरक्षा की बात है तो इसकी जिम्मेवारी प्रशासन की है न कि वन विभाग की.
आलोक कुमार, वन प्रमंडल पदाधिकारी, नवादा।

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