शराबियों को नशे की लत छुड़ाने पर प्रशासन सुस्त

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नवादा (रवीन्द्र नाथ भैया): जिले के 10,782 आदतन शराबियों को नशे की लत छुड़ाने के प्रति प्रशासन का रवैया उदासीन बना हुआ हैं. स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सदर अस्पताल में स्थापित नशामुक्ति केन्द्र में अबतक मात्र 80 लोग ही इलाज कराने आये. शेष 10,702 शराबी आज भी कहीं न कहीं से शराब का सेवन कर रहे हैं या फिर वैकल्पिक नशा का उपयोग कर रहे है. ऐसे में प्रशासन व सरकार चाहे अपनी पीठ जितनी भी थपथपा ले लेकिन सच्चाई यह है कि आज भी जिले में शराब हर जगह आसानी से उपलब्ध हो रही है.


बिहार-झारखंड की सीमा से शराब की आपूर्ति हो रही है. भले ही प्रतिदिन शराब की खेप के साथ गिरफ्तारी हो रही है लेकिन धंधा बदस्तूर जारी है. ऐसे में नशामुक्ति केन्द्र में जाकर इलाज कराने से कहीं बेहतर लोग महंगी ही सही लेकिन शराब खरीदकर पीने में ही अपनी भलाई समझ रहे हैं. चिकित्सकों का मानना है कि चिन्हित होने वाले लोग वर्षों से शराब के आदि हैं बावजूद नशामुकित केन्द्र में नहीं पहुंच रहे हैं. इससे स्पष्ट पता चलता है कि उन लोगों को कहीं न कहीं से शाराब की आपूर्ति की जा रही है.

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एक को भेजा था पीएमसीएचः-

इन 80 भर्ती किये गये आदतन शराबियों में से मा़त्र एक रोह प्रखंड क्षेत्र के नजरडीह गांव के एक को मानसिक संतुलन बिगड़ने के कारण पटना पीएमसीएच स्थानांतरित किया गया था. शेष को एक दो दिन बाद मुक्त कर दिया गया.
जेल भेजे गये पियक्कड़ों का नहीं हुआ इलाजः-

जिले में मई 2017 तक कुल 669 लोगों को अबैध शराब का धंधा व शराब सेवन के आरोप में जेल भेजा गया. ऐसे लोगों में से एक का भी इलाज सदर अस्पताल में नहीं कराया गया. उनकी शराब की लत छुड़ाने की यहां कोई व्यवस्था ही नहीं है. इस बावत नशा मुक्ति केन्द्र के चिकित्सक डा बी बी सिंह कहते हैं भले ही प्रशासन शराब पीने वालों को पकड़ कर जेल भेज रही हो लेकिन उसका इलाज कराना भी आवश्यक है. इस वजह से भी नशामुक्ति केन्द्र में मरीजों की संख्या कम हुई है.

मात्र 22 की हुई कांउसिलिंगः-

नशामुक्ति केन्द्र में आये 80 मरीजों में से मात्र 22 की काउसेलिंग की गयी है. इनमें से 54 ऐसे थे जो छोड़ छोड़ कर शराब का सेवन करते थे. विभाग ने उन्हें 15 का अंक दिया. मा़त्र एक ही ऐसा मरीज मिला जिसे 16 का अंक दिया गया. इन 80 में से ऐसे भी मरीज आये जो शराब के अलावा अन्य नशे का सेवन करते थे.
ऐसे होता है शराबियों का इलाजः-

शराब की लत छुड़ाने के लिये बनाये गये नशामुक्ति केन्द्र में चिकित्सकों व परामर्शियों की पुरी टीम तैयार की गयी है, जो आये मरीजों को साइन व सिम्टम देकर उन्हें साम दिनों के बाद बुलाते हैं ताकि उसके स्वास्थ्य की जांच की जा सके. ऐसे मरीजों को शराब की लत छुड़ाने के लिये उन्हें टेपरिंग कर धीरे धीरे शराब की खुराक कम करने की सलाह दी जाती है. हांलांकि चिकित्सकों का यह भी मानना है कि किसी भी लत को छुड़ाने के लिये समय की आवश्यकता है क्योंकि अचानक छोड़ने से शरीर पर कुप्रभाव पड़ता है.

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