नाम ऑफिसर कॉलोनी, व्यवस्था सर्वेंट क्वार्टर से भी बदतर

नवादा (पंकज कुमार सिन्हा) : नाम भले ही सुनने में आपकी ऑफिसर कॉलोनी लगे, परन्तु यहां रहने वाले लोगों के लिए व्यवस्था बिल्कुल ही नगण्य है. साफ सफाई के साथ ही भवन मेंटेनेंस पर भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है. नवादा शहर के बीचोंबीच स्थित ऑफिसर कॉलोनी में अव्यवस्था का आलम यह है कि सफाई की व्यवस्था नहीं के बराबर है.

 

अब कॉलोनी ऑफिसर्स की है तो कुछ ऑफिसर भी यहां रहते हैं. साथ में कुछ सहायक कर्मी, अस्पताल कर्मी और कोर्ट कर्मी भी रहते हैं. साफ सफाई के अभाव में क्वार्टरों में पेड़—पौधा उग आया है.

भवन की छत टूट कर गिर रही है. कई बार कॉलोनी के लोगों द्वारा भवन निर्माण विभाग को सूचना दिए जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होती है.

कॉलोनी में रहने वाले लोगों को भवन निर्माण विभाग की लापरवाही से काफी गुस्सा है. और तो और हाउस रेंट भी किसी से 7 हज़ार तो किसी से 4 हज़ार लिया जा रहा है.

लेकिन सुविधा के नाम पर कुछ नहीं. रास्ते में ही कूड़े का अंबार लगा है. लैट्रिन की टंकी खुली रहने से वातावरण भी दूषित हो रहा है.

जंगल की तरह घास फूस उँग जाने से मच्छरों के प्रकोप बढ़ गया है. लोगों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए कॉलोनी के अंदर पार्क भी बनवाया गया था.

लाखों रुपये की खर्च से बना पार्क खुद अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है. ऑफिसर कॉलोनी में प्रवेश करते ही एक क्वार्टर है , जिसमें वर्षों से कोई नही रहता. कुछ लोग इसे भूतहा जानकर उसमें रहने की हिम्मत नहीं जुटाते हैं.

सालों पहले यही क्वार्टर गुलजार हुआ करता था, जब सदर एसडीपीओ सुबोध प्रसाद परिवार के साथ रहा करते थे.

ऑफिसर कॉलोनी के लोगों की शिकायत है कि उनकी समस्या कोई सुनता ही नहीं. जब ऑफिसर कॉलोनी में रहने वाले लोगों की यह दशा है तो अन्य जगहों का आलम क्या होगा.

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