गजल ‘सम्राट’ को एक बिहारी का ट्रिब्यूट : गजब का फनकार था वो…

पटना : भारत के गजल सम्राट के नाम से मशहूर जगजीत सिंह की आज जयंती है. जयंती के अवसर बिहार के एक उनके एक खास फैन ने उन्हें अपने अंदाज में ट्रिब्यूट दिया है. पटना के श्री कृष्णा नगर के रहने वाले कुंदन श्रीवास्तव ने जगत सिंह के प्रति अपने असीम प्रेम को प्रस्तुत करने के लिए उनकी याद में गजलों का संग्रह तैयार किया है. जिसकी पहली किस्त यू ट्यूब पर रिलीज़ कर दी है. पेशे से लेखक और और पत्रकार कुंदन जगजीत सिंह को सम्पर्पित कई गजल लिख चुके हैं.

कुंदन द्वारा लिखे गजल को दिल्ली के जाने-माने गजल गायक पंकज श्रीवास्तव ने आवाज दी है. इन दोनों की इस एल्बम का नाम है Tribute to Jagjit Singh-गजब का फनकार था वो… इस एल्बम के पहले गीत को यू ट्यूब पर रिलीज़ कर दिया गया है. इसे लोग काफी पसंद भी कर रहे हैं. कुंदन बताते हैं कि आज रात तक उनका दूसरा गजल भी यू ट्यूब पर डाल दिया जाएगा.

कुंदन के अनुसार वे पिछले कई सालों से गजल लिखते आ रहे हैं. जगजीत सिंह के वो बहुत बड़े फैन हैं. उनके गजल में भी उन्होंने उनके शब्दों और उनके जीवन को प्रस्तुत करने की कोशिश की है. आप नीचे कुंदन द्वारा लिखी गजल को सुन सकते हैं.

बताते चलें, जगजीत सिंह का जन्म 8 फरवरी 1941 को राजस्थान के बीकानेर में हुआ था. पहले उनका नाम जगजीवन सिंह था बाद में उन्होंने इसे जगजीत सिंह कर लिया. उनके पिता चाहते थे कि जगजीत इंजीनियर बने पर उन्हें हमेशा से संगीत में रूचि रही. पढ़ाई के बाद ही जगजीत सिंह ने ऑल इंडिया रेडियो जालंधर में एक सिंगर और म्यूजिक डायरेक्टर के रूप में काम शुरू कर दिया था. साल 1965 में जगजीत सिंह अपने परिवार को बिना बताए मुंबई चले गए और संगीत की दुनिया में अपना संघर्ष शुरू कर दिया. मुंबई में जगजीत सिंह की मुलाकात एक बंगाली महिला चित्रा दत्ता से हुई. दोनों में प्यार हो गया और फिर साल 1969 में दोनों ने शादी कर ली. उन्हें एक बेटा विवेक भी हुआ.

साल 1976 में जगजीत सिंह और चित्रा की एल्बम ‘द अनफॉरगेटेबल’ रिलीज हुई जिसकी काफी प्रशंसा हुई. इस एल्बम की वजह से दोनों कपल स्टार बन गए. एल्बम के एक गीत ‘बात निकलेगी’ को लोगों ने काफी पसंद किया था. भारत सरकार की तरफ से जगजीत सिंह को साल 2003 में ‘पद्म भूषण’ सम्मान से नवाजा गया था. बेटे की मौत के बाद जगजीत सिंह काफी दुखी रहने लगे थे. 11 अक्टूबर 2011 को जगजीत सिंह की मृत्यु हो गयी. लेकिन, जगजीत सिंह आज भी अपने गजलों के साथ लोगों के बीच मौजूद हैं.

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