छोटा कद, बड़ी अदाकारी ; गुदड़ी के ये लाल बिहारी

‘एक बिहारी सौ पर भारी,’ की उक्ति तो आपने अवश्य ही सुनी होगी. दरअसल बिहारियों के बारे में लोग ऐसा इसलिए कहते हैं क्योंकि तमाम परेशानियां झेलकर भी बिहार के लोग जीवन के हर क्षेत्र में अपनी कामयाबी का परचम लहराने में कोई कोर-कसर नहीं रहने देते. बात जब बिहार और बिहारी की हो तो आपको ‘बड़े मियां तो बड़े मियां, छोटे मियां सुब्हानअल्लाह’ की उक्ति पर भी यकीन करना होगा. अगर यकीन नहीं हो रहा हो तो आइए मैं आपको बिहार की इन नन्‍हीं जानों की उंची उड़ान की दांस्तां से रूबरू कराता हूं. फिर तो आप अवश्यक ही यकीन करेंगे.

आठ अप्रैल से सोनी टीवी पर रियलिटी शो ‘सबसे बड़ा कलाकार’ का प्रसारण होने जा रहा है. इसमें बिहार के आठ बच्चे अपनी अदाकारी का जलवा बिखेरेंगे. सभी के सभी बिहार सरकार के शिक्षा विभाग द्वारा स्थापित संस्थान बिहार बाल भवन के नाट्य विधा में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे बच्चेे हैं. शायद आपको पता हो कि ‘बिहार बाल भवन’ लोगों के बीच ‘किलकारी’ नाम से ज्यादा लोकप्रिय है और पटना के सैदपुर (राजेन्द्रनगर) में अवस्थित है.

ज्योति परिहार यहां की निदेशक हैं और रवि मुकुल यहां बच्चों को नाटक का प्रशिक्षण देते हैं. शब्दश: धुन के पक्के. बच्चों के साथ प्रशिक्षण सत्र के दौरान उन्हेंं देखकर किसी को भी यह बात बड़ी आसानी से समझ में आ सकती है. सच में, मार्गदर्शक जब ड्यूटी की औपचारिकता से बढ़कर किसी के अभिनय हुनर को मांजने में स्वयं को जुनून की हद तक जाकर समर्पित कर दे तो फिर निष्फल कुछ भी नहीं होता है. सबकुछ सकारात्म‍क और फलित होता ही दिखता है. ‘सबसे बड़ा कलाकार’ रियलिटी शो में बच्चों की ताजातरीन कामयाबी उनके सेवा-समर्पण की ही परिणति है.

स्वयं को टीवी पर देखने की कल्पना कर खुश भला कौन नहीं होगा. जाहिर है, इस कामयाबी से बच्चे बहुत बेहद खुश हैं. सबसे ज्यादा खुशी नाट्य विधा के प्रशिक्षक रविकांत मुकुल के चेहरे पर दिखाई दे जाती है. वह गदगद भाव से बच्चों के इस सफरनामा का खुलासा करते हैं. बकौल मुकुल, ‘पटना के लिट्रा वैली स्कूल में सोनी टीवी के एक्टिंग रियलिटी शो ‘सबसे बड़ा कलाकार’ का ऑडिशन हुआ था जिसमें पूरे सूबे से करीब 300 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था. बिहार के 14 बच्चों का इसमें चयन हुआ था. इन 14 बच्चों में से 12 बच्चे किलकारी के नाटक विधा के प्रशिक्षु थे. ये बच्चे थे- ईशु कुमारी, कोमल कुमारी, खुशबू कुमारी, सोनाली कुमारी, रोशन कुमार, आरव कुमार, विकास वैभव, आयुष कुमार, गौतम कुमार, ईशिता कुमारी,  हर्षराज और कुलभूषण कुमार. 

इसके बाद सभी बच्चों का कोलकाता में ऑडिशन हुआ. सोनी टीवी से लोग आए थे बच्चों की अभिनय प्रतिभा को परखने. इस सफर में चार बच्चोंं का साथ तो छूट गया, लेकिन आठ बच्चों को मुंबई ऑडिशन के लिए हरी झंडी मिल गई. सभी आठ बच्चे मुंबई गए. चार दिनों तक मुंबई में बच्चे रियलिटी शो का हिस्सा रहे. ऑडिशन लेने वाले जज भी कोई साधारण हस्ती नहीं थे, बल्कि मुंबई फिल्म इंडस्ट्री की जानी-मानी हस्तीे रवीना टंडन, अरशद वारसी और वोमन ईरानी ने बच्चों की अभिनय प्रतिभा को परखा. बच्चों ने वहां जमकर अभिनय किया और खूब तालियां बटोरीं.

हालांकि पांच बच्चे मेगाराउंड की बाधा नहीं लांघ पाये, लेकिन उनका यहां तक का सफर भी कम बड़ी कामयाबी नहीं कही जाएगी. तीन बच्चे मेगाराउंड का पहला चरण लांघ दूसरे चरण तक पहुंचने में, कामयाब रहे. लेकिन यहां तक आकर रियलिटी शो में उनका भी सफर थम गया. शो में उनका सफर भले थम गया हो लेकिन इस सफर में उन्होंने जो अनुभव और आत्म—विश्वास हासिल किया वह आने वाले समय में न जाने उन्हें कितनी कामयाबियां चखने का मौका देंगी, आप सहज कल्पना नहीं कर सकते. सभी सेलिब्रिटी जज ने बच्चों की अभिनय प्रतिभा की जमकर सराहना की और कहा कि हम फिल्म के कलाकार हैं. फिल्म की एक्टिंग तो छोटी एक्टिंग होती है. आप बड़े कलाकार हैं क्यों कि आप स्टे्ज पर एक्टिंग करते हैं. एक नवांकुर कलाकार के लिए इससे बड़ा काम्पिलीमेंट भला और क्या हो सकता है.

दरअसल इसकी वजह भी है. किलकारी की निदेशक ज्योति परिहार कहती हैं, ‘हौसला इन बच्चों की सबसे बड़ी पूंजी है. ज्यादातर बच्चे बेहद अभावों में पल-बढ़ रहे हैं. लेकिन कुछ कर गुजरने की चाहत और आगे बढ़ने के संकल्प के आगे सारी बाधाएं बौनी हो जाती हैं.’ अपने कथन में आगे वह जोड़ती हैं, ‘जो लोग सुविधाहीनता या अर्थाभाव को आगे बढ़ने की राह में बड़ी रूकावट मानते हैं, उन्हें आकर इन बच्चों की जिंदगी में बस जरा झांक कर देख लेना चाहिए और इनकी जो भी उपलब्धियां हैं, उस पर बस हल्की-सी एक नजर डाल लेनी चाहिए.’

और सच में, जब आपको यह जानकारी होगी कि यहां अलग-अलग विधाओं में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे ज्यादातर बच्चे साधारण कामगारों-श्रमजीवियों की संतानें हैं, तो आप सहज यकीन नहीं कर पाएंगे. संघर्ष इनके अभिभावकों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा हैं. कहने की जरूरत नहीं कि जीवटता तो संतानों को विरासत में हासिल हुई है. बस इन्हें जरा-सा मार्गदर्शन मिलता है और इनकी प्रतिभा एक बड़ी कामयाबी में प्रस्फुटित हो जाती है.’

प्रसंगवश बिना किसी का नाम जाहिर करते हुए आपको यह बता दें कि ‘सबसे बड़ा कलाकार’ कार्यक्रम में सोनी टीवी पर आप जिन बच्चों की अभिनय प्रतिभा को देखने जो रहे हैं उनमें से एक बच्ची के पिता रिक्शाचालक थे. वह अब इस दुनिया में नहीं हैं. बच्ची की मां दूसरों के घरों में चुल्हा-चौका कर अपने बच्चों को पाल—पोश रही हैं. एक बच्चे के पिता की गोलगप्पा की रेहड़ी लगाते हैं. आमदनी कितनी होती होगी और बच्चों का पालन-पोषण कैसे होता होगा, आप स्वयं समझ सकते हैं. इसी तरह एक बच्चे के पिता रसोइया हैं और खाना बनाने का काम करते हैं. एक बच्ची की माता जी किसी नर्सिंग होम में दाय का काम करती हैं. दूसरे बच्चों के घर की कहानी भी इससे कोई बहुत ज्यादा जुदा नहीं है.
किलकारी में नाट्य विधा में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे बच्चों के मुकुट में कामयाबी की अनगिनत कलगियां जड़ी हुई हैं. ‘नमस्कार जी नमस्कांर’ नाटक का देशव्यापी मंचन हो चुका है और हो रहा है.

राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, नई दिल्लीे के सलाना बाल रंग महोत्सव में इस नाटक की सफल प्रस्तुति हो चुकी है. ‘इंडिया का बेस्ट ड्रामेबाज’ टीवी रियलिटी शो में यहां का बच्चा अपनी ड्रामेबाजी से प्रशंसित हो चुका है. राज्य के तमाम महोत्सवों एवं सरकारी सांस्कृतिक कार्यक्रमों में तो बच्चों की प्रस्तुतियां नियमित तौर पर होती ही रहती हैं और खूब मुक्तंकंठ से सराही भी जाती हैं. नवाजुद्दीन सिद्दिकी अभिनीत बहुचर्चित फीचर फिल्म ‘मांझी: द माउंटेन मैन’ में यहां के बच्चे अपनी अदाकारी की छाप छोड़ चुके हैं. और न जाने कितने टीवी शोज, शॉर्ट फिल्म्स , डॉक्यूमेंटरी में यहां के बच्चों ने अभिनय से लोगों का मन मोहा है, उल्लेेख कर पाना कठिन है.

इन नन्हें अदाकारों की प्रत्येक कामयाबी के पीछे अगर किलकारी की निदेशक का मार्गदर्शन और प्रशिक्षक का समर्पण एक बड़ी वजह रही है तो हम इन बच्चों के अभिभावकों के अदृश्य योगदान को भी कतई नजरअंदाज नहीं कर सकते. वे सभी अभिभावक जिन्होंने तमाम मुश्किलों, धनाभावों के बावजूद अपने पालितों की चाहतों और सपनों को न सिर्फ जीवित रखा बल्कि उसे अपनी सहमति की संगति देकर हौसलों को उन्मुक्त उड़ान भरने की गति और शक्ति दी है, प्रशंसा के पात्र हैं. आखिर कामयाबी की सुंदर इबारतें लिखी भी तो ऐसे ही जाती हैं.

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