कालाधन पर कवायद : नहीं बताए स्रोत तो होगा बड़ा एक्शन

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पटना : कालाधन का कलंक पीछा नहीं छोड़ रहा है. नोटबंदी के बाद आनन-फानन में बैंक खातों में जमा किये गये रुपये करोड़ों में हैं. ऐसे में उन खातों पर इनकम टैक्स की नजर है, जिनमें नोटबंदी के बाद मोटी रकम जमा की गयी है. एक अनुमान के अनुसार वैसे खातों की संख्या लगभग 25 हजार है. इनमें सैकड़ों खाते जन-धन योजना के भी हैं. सूत्रों की मानें तो इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने उन खातों की जांच शुरू कर दी है.

बताया जाता है कि नोटबंदी के बाद कई ऐसे खातों में मोटी रकम जमा करायी गयी है, जिसमें पहले जीरो बैलेंस था. गौरतलब है कि 8 नवंबर को पूरे देश समेत बिहार में भी नोटबंदी लागू हुआ था. इनकम टैक्स को आशंका है कि उन खातों में कालाधन जमा किये गये हैं. ऐसे खाताधारकों के खिलाफ बेनामी संपत्ति कानून के तहत कार्रवाई की जायेगी. यदि बेनामी संपत्ति का मामला प्रूव्ड हो गया तो खाताधारकों को सात साल की सजा भी हो सकती है.

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सूत्रों की मानें तो जिन खातों पर इनकम टैक्स की नजर है, उन खातों में 2 लाख से लेकर 10 करोड़ तक जमा कराये गये हैं. केंद्रीय राजस्व बोर्ड की ओर से इन खातों की सूची इनकम टैक्स डिपार्टमेंट बिहार को भेजी गयी है. इसी सूची के आधार पर खाताधारकों को नोटिस भेजी गया था. उन्हें इनकम का सही स्रोत बताने या प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना का लाभ उठाने को कहा गया था. सूत्रों के अनुसार लगभग 300 लोग ही प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना में शामिल होने की बात कही है. ऐसे में बाकी खाताधारकों की परेशानी बढ़ सकती है.

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना में शामिल नहीं होने वाले खाताधारकों को इनकम का स्रोत बताना होगा. नहीं बताए जाने पर उनके खिलाफ इनकम टैक्स डिपार्टमेंट कड़ा एक्शन लेगा. उन्हें खाते में जमा राशि का 137 प्रतिशत टैक्स देना होगा और सात साल की सजा भी हो सकती है. यह भी बताया जाता है कि निशाने पर ​जो खाते हैं, उनमें अधिकतर ट्रेडर्स, कंपनी, बिल्डर, ज्वेलर्स, व्यापारी, ठेकेदारों आदि के खाते हैं.

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