जिसके नाम में ही रस, वो है शहर बनारस…

बनारस में बहुत ही फेमस कहावत है, ‘रांड, सांढ़, सीढ़ी, संन्यासी, इनसे बचे तो सेवे काशी’ अपनी एक दिन की यात्रा में रांड, सांढ़ से तो दूर रहा, पर सीढ़ी और संन्यासी से भेंट हो गयी. बनारस में करीब 87 घाट हैं, जिन पर कई किलोमीटर तक समानांतर चलनेवाली लंबी सीढ़ियां बनी हुई हैं. जब आप इन सीढ़ियों पर पैदल चलते हुए आगे बढ़ेंगे, तो घाट की दीवारों पर आपको हिंदु देवी-देवताओं के भित्ति चित्र (ग्रैफिटी) देखने को मिलेगी.

वहीं दूसरी ओर गंगा में डूबकी लगाते हुए श्रद्धालु, थोड़ा और नजर घुमाएंगे, तो सीढ़ियों पर बैठ चिलम फूंकते संन्यासी के भी दर्शन हो जाएंगे. इसके अतिरिक्त जीवन और मृत्यु का उत्सव देखना चाहते हैं, तो मणिकर्णिका घाट का रूख कर सकते हैं. शाम में अस्सी घाट पर मंत्र, झंकार और वाइब्स के साथ गंगा आरती इतनी अच्छी तरह से समन्वित की जाती है कि आप उस अद्भुत एहसास को जीवन भर नहीं भूल पाएंगे. बनारस के घाटों के बारे में बहुत सारी कहानियां हैं, पर वो फिर कभी. आज बनारस में बिताएं गए एक दिन का अनुभव आपके साथ शेयर करता हूं.

दशाश्वमेध घाट पर सूर्योदय

banaras1

बनारस में पहला दिन…

बनारस जिसके नाम में ही रस है, वो शहर बनारस है. जब आप बनारस में जाएंगे, तो आपको पुराने घर और हर चार क़दम पर एक छोटा सा मंदिर दिख ही जाता है. इस शहर की गलियों में भटकते हुए आपको ऐसा लगेगा कि आप जहां से चले थे, फिर वहीं आ गए. क्योंकि, घर भी एक जैसे होते है और मंदिर में रहनेवाले हनुमान और भोलेनाथ भी. फिर भी इस शहर की हर एक बात निराली है.

अस्सी घाट पर सुबह की आरती

Morning-Aarti

रविवार की सुबह बनारस में मेरा पहला दिन था. इसलिए सुबह-ए-बनारस को देखने का प्लान, जो पहले से ही तय था. उसे पूरा करने सुबह 4 बजे ही घाट पहुंच गया. दशाश्वमेध घाट पर बैठ खुले और विशाल आसमान की ओर देखने लगा. कुछ ही देर बाद सूर्य की लाल किरणें नीले आसमान में दिखने लगीं. जिस चीज के बारे में बहुत कुछ सुन रखा था, अब उसे प्रत्यक्ष रूप से देख रहा था. यह किसी दिव्य एहसास से कम नहीं था. सूर्योदय के साथ ही बनारस शहर का भी उदय होता दिख रहा था. सूर्योदय को देख मैंने जीवनचक्र को महसूस किया. क्योंकि, जो घाट कुछ पल पहले बिल्कुल शांत थे, जहां सिर्फ गंगा की लहरों का घाट से टकराने की आवाज सुनाई दे रही थी. वहां अचानक से सबकुछ बदल गया. बनारस की यह सुबह मेरे जीवन के सबसे बेहतरीन सुबह में से थी. मैं सूर्य को तब तक निहारता रहा, जब तक वो पूरी तरह से उदयमान न हो गए. सूर्योदय के बाद का जो दृश्य था, वो भी अलग ही था. वहां साधु, संत, महिलाएं, बच्चे सब एक साथ गंगा में डुबकी लगा रहे थे. हिंदु धर्म में मान्यता है कि आपके सभी पाप गंगा में एक डुबकी लगाने से ही खत्म हो जाते हैं.

दोपहर में गंगा का अद्भुत दृश्य

banaras8

ग्रैफिटी ऑफ़ हिंदु गॉड शिवा, पार्वती, गणेश एंड राम-सीता

banaras2

प्रसिद्ध मुंशी घाट

banaras7

अब इतनी जगह घूम फिर लिया है, तो भूख तो जोर की लगनी ही है. तो आइए बनारस के खान-पान से आपको रूबरू करा दें. यहां खानपान का अपना अंदाज है. ऐसा इसलिए कह रहा हूं, क्योंकि यहां की गलियों के नाम भी खाने-पीने के नाम पर रखे गए हैं. जैसे कचौड़ी गली, खोआ गली और नारियल गली. इन गलियों में आपको दहीबड़ा, चाट, गोलगप्पे, इडली सांभर और लस्सी से लेकर अमेरिकन, कोरियन, इटैलियन फूड तक मिल जाएंगे.

बनारसी मलाइयों, जो ठंड के दिनों में ओस की बूंदों से बनती है

banaras10

तो चलते है बनारस की स्वाद यात्रा पर…

चूंकि मैं वेजिटेरियन हूं, इसलिए मैं आपको नॉन वेजिटेरियन भोजन का स्वाद नहीं दे सकता. लेकिन, पूरी कोशिश रहेगी, इतना कुछ बता दूं कि आप प्रसन्न हो जाएं. बनारस में सुबह से लेकर शाम तक कई अलग चीजें मिलेंगी. अगर आप सुबह में कचौड़ी-जलेबी छोड़कर, समोसा मागेंगे तो बिना नाश्ता किए ही रहना पड़ सकता है. और ठीक इसी तरह शाम को कचौड़ी जलेबी तलाशेंगे तो खाली हाथ लौटना पड़ेगा.

माउथ वाटरिंग हॉट गुलाब जामुन

banaras4

हालांकि इस तरह का संकट आपको कुछ देर तक ही झेलना पड़ेगा. दोपहर होते ही खाने-पीने के कई विकल्प बाजारों में दिखने लगेंगे. और फिर आप टिक्की चाट, टमाटर चाट, मीठी लस्सी से लेकर मलाइयों और ठंडई तक का लुफ्त उठा सकते हैं.

थोड़ी सी जो पीली है

अगर इन सब व्यंजनों का बेहतरीन स्वाद लेना चाहते हैं, तो कचौड़ी जलेबी के लिए गोदौलिया के पास में ही मारवाड़ी बासा का रूख कर सकते हैं. वहीं मिठाई के लिए क्षीर सागर, टिक्की और टमाटर चाट के लिए काशी चाट भंडार और लस्सी के लिए लंका स्थित पहलवान लस्सी भंडार से बेहतर जगह कोई नहीं है.

यम्मी टमाटर चाट एट काशी चाट भंडार

granny-s-inn

एंड हमारा राष्ट्रीय मिठाई जलेबी, जिसे बनारस में जलेबा भी कहते है

banaras3

बनारस में मेरा पहला दिन इस तरह ही निकला, जिसका खर्च 1000 रुपये के करीब रहा. अगर आप भी बनारस घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो मेरे कुछ सुझाव हैं जिससे आपको मदद मिलेगी.

सुझाव-
(1) सुबह के मनोरम सूर्योदय को अवश्य देखें. यह आपको एक अच्छा अनुभव कराता है.

(2) घाट के नजदीक होटल खोजने का प्रयास करें, घाट से दूर रहना कष्टदायक हो सकता है और आप ट्रैफिक में फंस सकते हैं.

(3) ब्लू लस्सी शॉप की लस्सी को एवॉयड करें, क्योंकि लस्सी के नाम पर आपको ढेर सारी चीनी पिलायी जाएगी, जो आपको बीमार कर सकती है. स्वादिष्ट लस्सी के लिए आप पहलवान लस्सी भंडार का रूख कर सकते हैं. इसके अलावा साउथ इंडियन के लिए गोदौलिया चौक के पास ही अन्ना भोजनालय भी अच्छा आॅप्शन है.

(4) अगर शाम में गंगा आरती देखने का प्लान कर रहे हैं, तो आरती शुरू होने से पहले पहुंचकर बैठने के लिए जगह सुरक्षित कर लें.

जनाब बनारस के बारे में इतनी सारी जानकारी दे दी. अब इसे अपने तक ही क्यों रखना? शेयर तो बनता है…

Bihar Cafe में और पढ़ें :

Cool-Cool फीलिंग : समर वैकेशन में बिहार के इन टूरिस्ट स्पॉट्स पर जमकर करें एंज्वॉय

कपल्स के लिए जन्नत हैं पटना के ये पांच डेस्टिनेशन...

#SaturdayScoop : Patnaites के फेवरेट डेस्टीनेशन हैं, पटना के ये 5 बेस्ट हैंगआउट प्लेसेज

कबाब के शौक़ीनों के लिए खास, ये हैं पटना के बेहतरीन कबाब पॉइंट्स...

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*