आज हड़ताल पर हैं सूबे के अधिवक्ता,पटना में अदालती कामकाज ठप्प

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पटना (एहतेशाम) : केन्द्र सरकार के प्रस्तावित अधिवक्ता अधिनियम संशोधन बिल के विरोध में शुक्रवार को पटना हाई कोर्ट सहित सूबे के सभी न्यायालयों के लाखों अधिवक्ता एकदिवसीय हडताल पर हैं. अधिवक्ताओं के हडताल के कारण अदालतों में सन्नाटा पसरा रहा. पटना हाई कोर्ट सहित सभी न्यायालयों के अधिवक्ता अपने समय से अदालत तो पहुंचे लेकिन उन्होंने अपने को न्यायिक कार्यों से अलग रखा.

कई स्थानों पर अधिवक्ताओं ने अपने संघ एवं बार असोसिएशन के बैनर तले केन्द्र सरकार के प्रस्तावित बिल के विरुद्ध में प्रदर्शन भी किया और केन्द्र सरकार के विरोध में नारा भी लगाया. इस दौरान अधिवक्ताओं ने अपनी एकजुटता का प्रदर्शन भी किया. प्रदर्शन में शामिल अधिवक्ताओं ने स्पष्ट किया कि वे केन्द्र सरकार के उक्त निर्णय का हर हाल में विरोध करेंगे और अधिवक्ता विरोधी किसी भी संशोधन को बर्दाश्त नहीं करेंगे.

बताया जाता है कि लॉ कमिशन ऑफ इंडिया ने केंद्र सरकार को सौंपे ‘द एडवोकेट एक्ट, 1961 ; रेग्यूलेशन ऑफ लीगल प्रोफेशन’ शीर्षक की 266 वीं रिपोर्ट में उक्त अधिनियम में व्यापक बदलाव की सिफारिश केंद्र सरकार से की है. महिपाल सिंह राणा बनाम उत्तर प्रदेश राज्य; जुलाई 2016 में उच्च न्यायालय ने भी एडवोकेट अधिनियम के प्रावधानों की पुनरीक्षण लीगल प्रोफेशन में रेग्यूलेटरी मैकेनिज्म की संभावना व्यक्त की है.

उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश अनिल आर. दवे, कुरीयन जोसेफ और आदर्श कुमार के तीन न्यायाधीशों की पीठ ने लॉ कमिशन और भारत सरकार से इस संबंध में ठोस कदम उठाने को कहा है. इसी आधर पर लॉ कमिशन ने अपनी रिपोर्ट में एडवोकेट एक्ट में रेग्यूलेटरी मैकेनिज्म और रेग्यूलेटरी बॉडीज आदी से संबंधित संशोधन की सिफारिश की है. साथ ही साथ लॉ कमीशन ने इस संबंध में एडवोकेट ; एमेंडमेंट बिल, 2017 का ड्राफ्ट भी केंद्र सरकार को सौंपा है.

लॉ कमीशन ने अपनी रिपोर्ट में अधिनियम की धारा 24-ए और 26-ए के सब्टीच्यूशन के अलावा नये प्रावधन बनाने, प्री-इनरॉलमेंट ट्रेनिंग, प्रोफेशनल मिसकंडक्ट आदि पर चर्चा की है. इसी रिपोर्ट और संशोधन बिल के विरोध में बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा सांकेतिक रूप से शुक्रवार को एक दिवसीय हड़ताल की घोषणा की है. इसी के तहत आज अधिवक्ता खुद को अदालती के कामों से मुक्त रखेंगे.

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