शेयर घोटाले के 25 साल : अब मिली 4 बैंक अधिकारियों को सजा

लाइव सिटीज डेस्क : 1992 के चर्चित हर्षद मेहता शेयर घोटाले में 25 साल बाद  आखिरकार बैंक के चार पूर्व अधिकारियों को दोषी ठहराया गया है. सीबीआई की विशेष अदालत ने चारों अधिकारियों को तीन-तीन साल कैद और पांच हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है. हालांकि ऊपरी अदालत में अपील करने के लिए अदालत ने फिलहाल सभी को जमानत दे दी है. 

इन पर शेयर दलाल दिवंगत हर्षद मेहता को अवैध तरीके से करोड़ों रुपए का फायदा पहुंचाने का आरोप है.

विशेष जज एचएस महाजन ने करोड़ों रुपए के इस घोटाले में एमएस श्रीनिवासन (स्टेट बैंक ऑफ सौराष्ट्र के पूर्व फंड मैनेजर), विनायक देवस्थली (यूको बैंक के पूर्व असिस्टेंट मैनेजर), आर सीतारमण (एसबीआई की प्रतिभूति शाखा के अधिकारी) और पीए करखनिस (यूको बैंक के पूर्व सीनियर मैनेजर) को सजा सुनाई है. 

इन्हें भ्रष्टाचार, बैंक खातों में फर्जीवाड़ा करने समेत अन्य आरोपों में दोषी ठहराया गया है. अधिकारियों पर हर्षद मेहता के यूको बैंक स्थित खाते में गलत तरीके से पैसे ट्रांसफर करने का आरोप है.

श्रीनिवासन और अन्य आरोपी अधिकारियों ने फर्जी दस्तावेज के आधार पर मेहता के खाते में स्टेट बैंक ऑफ सौराष्ट्र का 198 करोड़ रुपया भी क्रेडिट किया था. कोर्ट ने पीएस गोखले को बरी कर दिया, जबकि मौत होने के चलते हर्षद मेहता और एमवी सिद्धाय के नाम को आरोपियों की सूची से हटा दिया गया था.

क्या है चर्चित शेयर घोटाला

इंडियन इकोनॉमी के लिए साल 1990 से 92 का समय बड़े बदलाव का वक्त था. देश ने उदारवादी इकोनॉमी की तरफ चलना शुरू ही किया था कि एक ऐसा घोटाला सामने आया, जिसने शेयरों की खरीद-बिक्री की प्रकिया में ऐतिहासिक परिवर्तन किए. हर्षद मेहता इस घोटाले के जिम्मेदार थे. हर्षद मेहता ने बैंकिंग के नियमों का फायदा उठाकर बैंकों को बिना बताए उनके करोड़ों रुपयों को शेयर मार्केट में लगा दिया था.

घोटाले के मुख्य आरोपी हर्षद मेहता की 2002 में मौत हो गई थी, जिसके बाद उसके खिलाफ केस को बंद कर दिया गया. टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, जस्टिस शालिनी फनसालकर जोशी ने दोषियों की इस दलील को खारिज कर दिया कि वे करीब दशकों से मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या से जूझते रहे हैं, लिहाजा उन्हें माफ कर दिया जाए.

जज ने अपने फैसले में कहा था, ‘यह सच है कि इस मामले में अपराध 24 साल पहले यानी साल 1992 में हुआ था. इन 24 सालों में आरोपियों को मानसिक और शारीरिक कष्टों को सहना पड़ा.’ जज ने आगे कहा कि इसके बावजूद अपराध की गंभीरता को भी समझना होगा. अदालत ने कहा कि अपराध बहुत ही गंभीर श्रेणी का है, ये नेशनल बैंक से धोखाधड़ी के जरिए करोड़ों रुपये निकालने का मामला है. आरोपियों के इस कृत्य (घोटाले) की वजह से देश की अर्थव्यवस्था डगमगा गई थी. जिसके बाद अदालत ने हर्षद मेहता के भाई सुधीर और दीपक मेहता को दोषी करार दिया.

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