सावधान : मिलावट का जहर, स्वास्थ्य पर कहर

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लाइव सिटीज डेस्क : आज जनसामान्य के बीच एक आम धारणा बनती जा रही है कि बाजार में मिलने वाली हर चीज में कुछ न कुछ मिलावट जरूर है. जनसामान्य की चिंता स्वाभाविक ही है. आज मिलावट का कहर सबसे ज्यादा हमारी रोजमर्रा की जरूरत की चीजों पर ही पड़ रहा है. संपूर्ण देश में मिलावटी खाद्य-पदार्थों की भरमार हो गई है. आजकल नकली दूध, नकली घी, नकली तेल, नकली चायपत्ती आदि सब कुछ धड़ल्ले से बिक रहा है. अगर कोई इन्हें खाकर बीमार पड़ जाता है तो हालत और भी खराब है, क्योंकि जीवनरक्षक दवाइयाँ भी नकली ही बिक रही हैं.

 

एक अनुमान के अनुसार बाजार में उपलब्ध लगभग 30 से 40 प्रतिशत समान में मिलावट होती है. खाद्य पदार्थों में मिलावट की वस्तुओं पर निगाह डालने पर पता चलता है कि मिलावटी सामानों का निर्माण करने वाले लोग कितनी चालाकी से लोगों की आँखों में धूल झोंक रहे हैं और इन मिलावटी वस्तुओं का प्रयोग करने से लोगों को कितनी कठिनाइयाँ उठानी पड़ रही हैं.

फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स रेगुलेशन्स के मुताबिक कैल्शियम कार्बाइड नामक केमिकल से पकाए गये फलों को बेचना पूरी तरह से प्रतिबंधित है. आपको जानकर हैरानी होगी कि आज से 53 वर्ष पहले 1964 में ही सरकार ने फलों को पकाने में कैल्शियम कार्बाइड के इस्तेमाल को प्रतिबंधित किया हुआ है. लेकिन नियमों का पालन नहीं हो रहा और अब भी ये खतरनाक केमिकल फलों को पकाने के लिए इस्तेमाल हो रहा है.

-आमतौर पर फल व्यापारी इस केमिकल को मसाला कहते हैं और इससे आम, केले या फिर पपीते पकाए जाते हैं.
-कैल्शियम कार्बाइड हमारे शरीर के लिए बहुत ख़तरनाक होता है.
-डॉक्टरों के मुताबिक इस खतरनाक कैमिकल के लगातार इस्तेमाल से कैंसर होने की पूरी आशंका रहती है.
-इसके खिलाफ IPC की धारा 272 और 273 के तहत प्रावधान है. खाने में मिलावट करने पर अधिकतम 6 महीने की सज़ा और 1 हज़ार रुपये का जुर्माना हो सकता है.
-हाल के वर्षों में सरकार ने इस खतरनाक केमिकल का इस्तेमाल करके फल पकाने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी की है.
-पिछले 3 वर्षों में गलत तरीकों से फल पकाने वाले करीब 12 हज़ार लोगों पर जुर्माना लगाया गया.
-और पिछले 3 वर्षों में इन लोगों से करीब 40 करोड़ रुपये का जुर्माना भी वसूला है.
-लेकिन इसके बावजूद फलों को जल्दी पकाने का अवैध काम बिना किसी डर के चल रहा है.
-ऐसे फल या सब्ज़ियां चुनें, जिन पर कोई दाग-धब्बा न हो.
-हमेशा फल और सब्ज़ियों को खाने से पहले अच्छी तरह से धो लें.
-सब्ज़ियों और फलों का छिलका निकालकर इस्तेमाल करने से केमिकल्स का असर कम होता है.
-जो भी आम कृत्रिम तरीके से पका होगा, उसमें पीले और हरे रंग के पैचेज होंगे, यानी पीले रंग के बीच-बीच में हरा रंग भी दिखेगा.
-जबकि प्राकृतिक तौर पर पका हुआ आम पूरी तरह से पीला या हरा ही होगा.
-हमेशा मौसमी फलों और सब्ज़ियों को ही चुनें, अगर मौसम से पहले के फल या सब्ज़ियां मिल रहे हों, तो उन्हें न खरीदें.
-अगर आपको लगता है कि जो फल और सब्ज़ियां आप खाते हैं, उनमें कुछ मिलावट है, तो आप इसकी शिकायत कर सकते हैं.
-आप अपने शहर के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ऑफिश में इसकी शिकायत कर सकते हैं.

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