जुड़ शीतल पर बच्चों को दिया आशीष, चला दावतों का दौर

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फुलपरास/मधुबनी : त्योहारों के मामले में बिहार में मिथिलांचल आगे है. यहां कुछ लोकल त्योहार भी मनाये जाते हैं. बात मधुश्रावणी की हो या सौराठ सभा की. इसी कड़ी में शनिवार को जुड़ शीतल त्योहार मनाया जा रहा है. हालांकि सुबह में हुई तेज आंधी व बारिश से लोग थोड़ा परेशान हुए. बाद में सब ठीक हो गया.

जुड़ शीतल में आज क्या हुआ
मिथिलांचल का पारंपरिक जुड़ शीतल त्योहार शनिवार को हर्षोल्लास के वातावरण में मनाया गया. मान्यताओं के अनुरूप आज सूर्योदय से पहले घरों में खाना बनाने, अग्निदेव की पूजा करने, बड़े बुजुर्गों द्वारा कनिष्ठों के माथे पर शीतल जल डालकर उनके सुखद भविष्य का आशीर्वाद देने जैसी बातों को लेकर पूर्वाह्न में लोगों की व्यस्तता रही. महिलाएं स्वादिष्ट भोजन एवं पकवान बनाने तथा घरों की साफ सफाई में लगी रही. पवित्र तालाबों एवं सरोवरों में डुबकी लगाकर लोगों ने पूजा अर्चना की. बच्चों को आशीष मिला तथा दिन भर दावतों का दौर चलता रहा. वहीं पूर्वाह्न में आई आंधी एवं पानी के कारण त्योहार को लेकर लोगों का उत्साह कुछ देर के लिए कुंद पड़ गया.

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क्या है सौराठ सभा
यह मिथिलांचल में प्रतिवर्ष लगनेवाला एक विशाल सभा है, जिसमें योग्य वर का चुनाव वहां आए कन्याओं के पिता करते हैं. चुनाव से पहले सौराठ सभागाछी में उपस्थित लोगों के बीच बहुत प्रकार की चर्चाओं, जिनमें मुख्य रूप से कुल, मूल और पंजिका होती हैं; जिनके जितने बड़े कुल-मूल-पंजी होते हैं, उनकी पूछ उतनी ही अधिक होती है. हालांकि इस आधुनिकता की चमक-दमक ने अब लोगों को लड़कों के व्यक्तिगत गुण, आचरण और रोजगार को मुख्य जांच का विषय बना दिया गया है.

क्या है मधुश्रावणी
मधुश्रावणी पर्व मिथिलांचल की अनेक सांस्कृतिक विशिष्टताओं में एक है. मिथिलांचल में नव विवाहिताओं द्वारा की जाने वाला यह व्रत अपने सुहाग की रक्षा की कामना के साथ किया जाता है. सावन माह के कृष्ण पक्ष से शुरू होकर 15 दिनों तक चलने वाला यह पर्व टेमी के साथ संपन्न हो जाता है. इस पर्व में गौरी-शंकर की पूजा तो होती ही है, साथ में विषहरी व नागिन की भी पूजा होती है.

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