देश में बेटियों की सुरक्षा के लिए 72 घंटे का उपवास, अब तो जागो सरकार…

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पटना : कठुआ और उन्नाव गैंगरेप में आरोपियों को कड़ी सजा तथा बेटियों की सुरक्षा के लिए पटना के गांधी मैदान में 72 घंटे के उपवास पर बैठी इन महिलाओं का आज तीसरा दिन है. कुछ समाजसेवी लोगो ने मिल कर इस उपवास का कार्यक्रम रखा है. वह बैनर, पोस्टर, गीत और नाटक के माध्यम से अपनी बात लोगों तक तथा सरकार तक पहुंचा रहे हैं. कई बड़े समाजसेवी, राजनेता और पत्रकार भी इनके साथ जुड़ रहे हैं. उपवास पर बैठे लोगों में नीलू, उर्मिला, प्रतिभा, रीना सिन्हा, प्रभाकर, निवेदिता, सूर्यकांत, मोहम्मद महताब, अकांक्षा शामिल हैं.

कुंभकरण की नींद को छोड़कर जागे सरकार

इस उपवास में लोगों ने सीधे तौर पर सरकार को निशाना साधा. उन लोगों ने कहा कि कुंभकरण की नींद को छोड़कर सरकार को अब उन बेटियों के लिए सोचना चाहिए जिनके लिए कहीं ना कहीं सरकार बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जैसे कई मुहिम चला रही है. कहां गई सरकार कहां है उनके कानून. क्यों नहीं मिल रही है सजा. क्यों दरिंदे दिखा रहे हैं अपनी दरिंदगी.

जिस बेटी के कारण बड़े-बड़े बातें किया करते थे कहां गई वह बातें. इस तरह की और भी कई बातें इस अनशन उपवास में कहीं गई. वक्ताओं ने कहा कठुआ और उन्नाव मामले में सरकार की ओर से बचाव करने वाला रवैया दुखद है. इस मामले में राजनीति नहीं होनी चाहिए. इसको सांप्रदायिक रंग देना भी दुखद है. इसमें निष्पक्ष कार्रवाई होनी चाहिए. और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए.

कहीं से भी शुरुआत होनी चाहिए

72 घंटे के उपवास पर बैठी संस्कृति फाउंडेशन की अकांक्षा ने कहा- आज मै किसी नेता के लिए नहीं अपनी मांगों के लिए नहीं आज मैं उन बेटियों के लिए 72 घंटे की उपवास कर रही हूं, जिसे उन दरींदो ने अपनी हवास का शिकार बनाया. और ये नही सोचा की यही बेटी किसी रूप मै मां है किसी रूप मै बहन है किसी रूप मै एक पत्नी है. उन्होंने आगे कहा- मै इस उपवास के माध्यम से सरकार को सोती कुंभकर्ण निद्रा से जगाना चाहती हूं. कि कोई दरिंदा ये हरक़त दुबारा करने की जुर्रत न करे.

कोइ ज़रूरी नहीं है कि मेरे इस उपवास से सारा तंत्र सुधर जाये पर अगर ऐसा सोचे कि इससे कुछ नहीं होगा तो उन दरींदो का मनोबल बढ़ते जायेगा. आज हम कर रहै है एक छोटी शुरूआत तो कहीं न कहीं इस छोटी शुरूआत का फ़ायदा आवाम को जरूर मिलेगी. मैं आप लोगों से अपील करतीं हूं आप एक क़दम आगे बढे तो शायद सरकार कुंभकर्णी निद्रा से जगे.

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