खानकाह मुजीबिया सलाना उर्स : जुमा की नमाज़ में जायरीनों ने मांगी मुल्क में अमन-चैन की दुआ

फुलवारीशरीफ (अजीत शर्मा) : इस्लाम के अंतिम पैगम्बर हजरत मोहम्मद स0 व0 के यौमे पैदाइश के अवसर पर सुप्रसिद्व खानकाह मुजीबिया के सलाना उर्स व मेले के दूसरे दिन जायरीनों की भीड़ उमड़ गयी और अब तक जायरीनों के आने का दौर जारी है. जुमा का दिन होने के कारण भारी संख्या में जायरीनों ने जुमा की नमाज पढी. देश और राज्य की उन्नाति, शांति आपसी सौहार्द के लिए दूआं मांगी. पूरा खानकाह मुजीबिया जायरीनों से पटा हुआ है.

खानकाह मुजीबिया की ओर से आयोजित लंगर में जायरीनों की तब्बर्रुक लेने के लिए भीड़ उमड़ गयी और लोगों ने श्रद्वा सुमन के साथ तब्बुर्रक लिया.  सज्जादानशीं सैयत हजरत शाह आयातुल्लाह कादरी ने शुक्रवार की देर शाम खानकाह मुजिबीया केसंस्थापक पीर मुजीबउल्लाह कादरी केमजार शीरफ पर अकीदत केसाथ चादर पोशी की

उधर इस्लामिक उर्स कमेटी की ओर से पैगम्बर मोहम्म्द स0 व0 के यौमे पैदाइश के मौके पर शीश महल में हजारों लोगों ने मू-ए-मुबारक (पवित्र बाल) की जियारत की. सुबह में महिलाओं ने भारी संख्या में मू-ए-मुबारक की जियारत की. दिन में तीन बजे मर्दों ने भी मू-ए-मुबारक की जियारत की.

इस्लामिक उर्स कमेटी के अध्यक्ष जावेद महमूद, उपाध्यक्ष सैयद मुजीबुर रहमान, महासचिव सैयद जिया उर रहमान मौजुद थे. मदरसा इस्लामिया शमसुल होदा के प्राचार्य महशूद अहमद कादरी नदवी ने मोहम्मद साहेब की शान में मनकबत पढ़ी. वहीं इस्लामिक विद्वान सैयद हेलाल अहमद कादरी ने मोहम्मद साहेब के जीवन पर प्रकाश डालते हुये मोहम्म्द साहेब की जीवनी पर चर्चा की. इस के बाद लोगों ने तर्बरूक लिया.

क्या कहते है जायरीन
1. पूर्णिया से आये हाजी नौशद अली ने कहा कि लगातार बीस सालों से मू-ए-मुबारक की जियारत के लिए आ रहा हू. यहां आने से लोगों को फैज मिलती है और दिल को सकुन मिलता है.

2. धनबाद से आये मो मुर्तजा अंसारी ने कहा कि उर्स की विशेषता बहुत है. पीछले पांच वर्षों से जियारत करने के लिए आता हूं. इस दरबार से जाने की तबियत नहीं करती है.

3. पटना से आये रिटायर्ड कर्मी मो. नेयाजुर्रहमान ने बताया कि इसी दरबार से बैत हुआ हूं. यहां आकर दिल और दिमाग को सुकून मिलता है.

4. कटक आये मुख्तार अली खान ने बताया कि पंद्रह साल से लगातार आ रहा हू. इस दरबार से मुझे हर कुछ मिला है. मेरा पूरा परिवार इस दरबार से बैत है.

5. यपी से आयी दिलरोज बेगम ने कहा कि यहां आने से दिल और दिमाग को चैन मिलता है. सारी मुरादें पूरी हो जाती है. यहां से जाने का दिल नहीं चाहता है.

6. झारखंड से आई जैबुन निशा ने कहा कि दस साल से आ रही हूं. दरबार की मिटटी पाक है और हर मुरादें पूरी हुयी है.

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