बीत गया रोहणी, आया आद्रा नक्षत्र, मानसून की दगाबाजी से मायूस हैं कृषक 

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बिहटा (मृत्युंजय कुमार) : धान का कटोरा कहा जाने वाला सोन नहर का इलाक़ा वर्षों से सिंचाई व्यवस्था की बदहाल हालत का शिकार बना हुआ है. जिससे पिछले कुछ वर्षो से इस इलाके के किसानों की हालत दिनों दिन बदहाल होती जा रही है. धान का बिचड़ा डालने के लिये सबसे उत्तम रोहणी नक्षत्र बीत गया और उसकी रोपनी का सबसे बेहतर समय आद्रा नक्षत्र भी आ गया. लेकिन खेतों में पानी नही है. नमी भी भागती जा रही है और किसान परेशान हैं. लेकिन उनका सुधि लेने वाला कोई नहीं है. वे सरकार औऱ इंद्रदेव की ओर टकटकी लगा इस बात का इंतजार कर रहे है कि आखिर कब नहर में पानी आएगा, कब पानी बरसेगा. जिससे वे धान की रोपनी शुरू कर सके.

बताया जाता है कि जून में अधिकांश किसान धान का बिछड़े को खेतों में रोपने के लिए शुभ मुहूर्त मानते हैं. सोन नहर का मनेर रजवाहा हो या मुख्य केनाल, अभी तक उसमें एक बूंद पानी नहीं है. मौसम भी दगा दे रहा है. अधिकांश राजकीय नलकूपो की हालत बदतर है. और यह हाल इस क्षेत्र में कई वषों से है. जिससे धान की खेती के लिये मशहूर इस इलाके के किसानो की हालत दिनोदिन बिगड़ती जा रही है. इंद्रदेव भी किसानों को तरसा रहे हैं, औऱ किसान हाथ पर हाथ धरे अपने किस्मत को कोस रहे हैं.

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किसानों का कहना है कि इस बार भी यदि सोन नहर को रजवाहो में नहीँ छोडा गया तो पिछले कुछ बरसों की तरह इस बर्ष भी धान की खेती प्रभावित हो सकती है. नलकूपों से पानी पटाकर उन लोगों ने बिचड़ा को किसी तरह अभी तक बचा रखा है. लेकिन यदि वे निजी नलकूपों के सहारे खेती करेगे तो ख़र्च इतना आयेगा कि उतनी कीमत उन्हे क़भी भी नहीं मिल पायेगी. यदि किसी तरह बिचड़े को बचाकर धान की रोपनी कर भी दी तो उसे उपजाने में उनकी कमर टूट जायेगी. किसानो का कहना है कि उन्हें सरकार तो नही सिर्फ इन्द्रदेव ही बचा सकते हैं. क्योंकि यदि इस वर्ष भी मानसून धोखा दिया तो वे लोग कहीं के नहीं रह पाएंगे.

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