नाटक ‘लोटा मजिस्ट्रेट’ में दिखी नियोजित शिक्षकों की पीड़ा

फुलवारीशरीफ (अजीत): साप्ताहिक संवाद श्रृंखला की कड़ी में सांस्कृतिक ईवा सामाजिक संस्था सदा की ओर से उदय कुमार लिखित एवं निर्देशित नाटक “लोटा मजिस्ट्रेट” का प्रदर्शन खगौल स्थित दानापुर रेलवे स्टेशन परिसर में किया गया. नाटक का शुभारम्भ “शिक्षक बन लोटा मजिस्ट्रेट, खींचे फोटो शाम सबेरे… से हुई.

नाटक में नियोजित शिक्षकों की पीड़ा को दर्शाया गया. एक तो मध्यान भोजन को लेकर शिक्षक पढ़ाये क्या भोजन बनवाने और छात्रों को खिलाने में ही लगा है. ऊपर से कभी जनगणना, कभी पशु– पेड़ गणना, मतदाता पहचान पत्र बनाने आदि के बाद यह नया फरमान – अब “खुले में शौच करने वालों की फोटो खीचना“. कैमरा लेकर इधर– उधर भागते, पीछे लोगों का शोर, जान बचाकर भागते शिक्षक, खदेड़ते लोग- शर्म–शर्म– शर्म- जैसे कई दृश्य… इस फरमान से शिक्षक बेहद असहज महसूस कर रहे हैं.

जिस विद्यालय में वो पढ़ाते हैं , जहां कुछ सम्मान अर्जित किया है, उसी क्षेत्र में खुले में शौच कर रहे लोगों की फोटो खींचना, यह शिक्षक तो क्या किसी के लिए भी शर्म की स्थिति है. बेचारे शिक्षक एक तरफ समान वेतन की मांग कर रहे हैं, लाठियां भी खा रहे हैं, लम्बे समय तक वेतन का इंतज़ार करते हैं, घर–परिवार की आवश्यक जरूरते पूरी नहीं कर पाते, दूसरी तरफ समाज में इनकी छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है और सरकार भी इनके प्रति उदासीन है. हालत ये है कि ये न घर के हैं न घाट के.

नाटक में शिक्षक उन दिनों को भी याद करते हैं जब शिक्षक का बेहद सम्मान हुआ करता था. अब तो शिक्षकों की पढ़ाई छोड़ सारे कामों में लगा दिया जा रहा है. अंत में यह सन्देश आता है की फरमान वापस ले लिया गया है. शिक्षक कहते हैं –“ पर सरकार हमारे प्रति अपनी सोच तो नहीं बदली है, लोग अब शिक्षकों को “लोटा मजिस्ट्रेट“ कहने लगे हैं.

नाटक में रामनाथ प्रसाद, मनोज सिन्हा, उदय कुमार, राकेश प्रेम, शोएब कुरैशी, शशिकांत, संजय साहनी, विजय कुमार, अशोक सिंघल, संजय साहनी,  प्रभात किशोर आदि लोग शामिल रहे.

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