देश-विदेश से भी उठ रही मांग #English_Compulsory_in_Bihar

लाइव सिटीज डेस्क (रजिया अंसारी) : अंग्रेजी विरोध के और विरोध करने वालों के, दोनों के दिन अब लद चुके हैं, क्योंकि अब आवाज अंग्रेजी के पक्ष में उठ रही है, और पुरजोर उठ रही है. लोग समझ चुके हैं कि ‘कर्पूरी डिविजन’ से परीक्षा पास करके भी जिंदगी में आखिर क्या हासिल हो पाएगा क्योंकि चपरासी की नौकरी तक के लिए अंग्रेजी की जानकारी की उम्मीद की जाती है. इसलिए जीवन में अगर कुछ करना है तो बिहार में अंग्रेजी के पक्ष में माहौल तो बनाना ही होगा.

कर्पूरी ठाकुर जब बिहार के मुख्यमंत्री हुआ करते थे, तब से ही बिहार में 10 वीं की परीक्षा में अनिवार्यता समाप्त कर दी गई. इतने सालों में बिहार के बच्चों को जितना नुकसान उठाना था, उठा लिया, अब और नहीं उठाएंगे. इसलिए बिहार बोर्ड की 10वीं परीक्षा में अंग्रेजी विषय को अनिवार्य करने की मांग जोर पकड़ने लगी है.

cartoon

बिहार के युवा सोशल मीडिया पर #English_Compulsory_in_Bihar हैश टैग चला रहे हैं. फरीद आलम, मुख्तार अहमद, मो. जावेद, मनंजय, मोहम्मद हुसैन, वकार अहमद, नाहिद हुसैन, आदित्य, शाह आलम, मनंजय, अभिनव कुमार, नसीम अनवर, सोहराब अंसारी, तमन्ना मसूद, अर्चना सिंह, इत्यादि तमाम युवा इस मुहिम से जुड़े हुए हैं. फेसबुक, ट्वीटर के साथ—साथ इस समय देश में चलन से लगभग बाहर हो चुके पोस्टकार्ड के माध्यम से भी इस मुहिम को संचालित किया जा रहा है.

yuva

#LiveCities से बात करते हुए पेशे से इंजीनियर मुख्तार अहमद ने बताया कि हिन्दी हमारी राज भाषा, राष्ट्र भाषा के साथ—साथ मेरी मातृभाषा भी है. उर्दू अदब और तहजीब की ज़बान है. हिन्दी की ये खासियत है कि यह अपने में किसी भी भाषा को समाहित कर लेती है, अंग्रेजी भाषा भी कोई अपवाद नहीं है. हिन्दी भाषी भी आम बोलचाल में अंग्रेजी शब्दों का प्रयोग करते हैं. बिहार में अंग्रेजी विषय अनिवार्य होना ही चाहिए.

post card

मोहम्मद जावेद ने कहा कि मुझे भी कई बार ऐसा महसूस हुआ कि बिहार में अंग्रेजी अनिवार्य होना चाहिए. वह एक घटना बताते हुए कहते हैं कि बिहार से पढ़ाई पूरी करने के बाद जब आगे की पढ़ाई के लिए दूसरे राज्य गए तो उन्हें क्लास में सबसे पीछे बैठना पड़ता था. बैठना पड़ता क्या था, दरअसल मजबूरी थी, क्योंकि अंग्रेजी में दिए गए लेक्चर उनके पल्ले पड़ता ही नहीं था. आखिरकार अंग्रेजी के दहशत में कब तक बैक—बेंचर्स के ग्रुप में शामिल रहते सो, उन्होंने इससे निजात पाने की ठानी. सबसे पहले शब्दकोश खरीदा और अंग्रेजी सीखने लगे. आगे वह बताते हैं कि अगर अंग्रेजी के प्रति आदमी बचपन से सीरियस रहे तो परिणाम न केवल बेहतर हो सकता है, बल्कि उम्मीद से परे बेहतर हो सकता है.

gyapan

गोपालगंज से ही पेशे से शिक्षक फरीद आलम ने बताया कि मैं मैट्रिक एग्जाम ले रहा था, जिसमे बच्चे OMR शीट पर निर्देश के अनुसार कुछ भी फिलअप नहीं कर पा रहे थे. लगातार वाइटनर का प्रयोग हो रहा था. यह मुझे काफी नागवार गुजरा कि हमारे बच्चों की अंग्रेजी की जानकारी इतनी ख़राब है. आज अगर अंग्रेजी अनिवार्य होती तो हममें और भी ज्यादा समझदारी रहती और शायद ऐसी गलती नहीं हो पाती.

fareed aalam

युवाओं की इस मुहिम का देश-विदेश के छात्रों का भी समर्थन मिल रहा है. वहीं दूसरे राज्यों के छात्रों ने भी अंग्रेजी को अनिवार्य करने की मुहिम का समर्थन किया है. लोगों ने हस्ताक्षर अभियान भी चलाया तथा इस क्रम में सांसदों, जिला अधिकारियों और विधायकों को ज्ञापन भी सौंपा.

gyapan dena

फरीद आलम ने कार्टुन के माध्यम से बिहार की शिक्षा में अंग्रेजी की अनिवार्यता की मांग की है. इन लोगों का कहना है कि हमारी कोशिश है कि हमारी बात मुख्यमंत्री तक पहुंचे और वह इसकी गंभीरता को समझें. एक बार अगर यहां के बच्चों की अंग्रेजी की समझ बेहतर हो गई तो कहने की जरूरत नहीं कि वह कहीं भी कामयाबी का परचम आज से ज्यादा बुलंदी से लहरा पाएंगे.

बिहार में अंग्रेजी अनिवार्य करने की मांग करने वाली इस मुहिम की कुछ और तस्वीरें देखें…

child
बच्चे भी शामिल हैं इस मुहिम में
videshi child
विदेश में बैठा ये बच्चा भी चाहता है #English_Compulsory_in_Bihar
suadi
रोजगार के लिए विदेश गये ये नौजवान भी कह रहे बिहार में अंग्रेजी अनिवार्य हो

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*