…फिर नीतीश ने कहा, फिल्म अभी चलने दो

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पटना (नियाज आलम) : चंपारण सत्‍याग्रह शताब्‍दी वर्ष 2017-18 के अवसर पर कला, संस्‍कृति एवं युवा विभाग के अतंर्गत बिहार राज्‍य फिल्‍म विकास एवं वित्त निगम लिमिटेड द्वारा पुराना सचिवालय स्थित अधिवेशन भवन में आयोजित गांधी पैनोरमा फिल्‍म महोत्‍सव का सोमवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उद्घाटन किया. इस अवसर पर महोत्सव के तहत महात्मा गांधी के जीवन पर आधारित दो फिल्में ‘क्षमा’ और ‘द मेकिंग ऑफ द गांधी’ का प्रदर्शन किया गया.

फिल्म को मुख्यमंत्री ने अपने पूरे सरकारी अमले के साथ देखा. इस दौरान तय कार्यक्रम के तहत मुख्यमंत्री ने विरासत विकास समिति द्वारा पूरे वर्ष आयोजित होने वाली विरासत यात्राओं के लिए बस को हरी झंडी दिखा कर रवाना भी किया. इसके बाद वापस आकर फिर से फिल्म द मेकिंग ऑफ द गांधी देखने लगे. इस दौरान जब किसी कारण से दोबारा फिल्म को रोका गया तो मुख्यमंत्री ने इसे चलाने का आदेश दिया. इसके बाद नीतीश कुमार पूरी फिल्म देखकर ही उठे. दो घंटे से ज्यादा समय की इस को फिल्म देखने के बाद मुख्यमंत्री मीडिया से बात किए बगैर ही चले गए.

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इससे पहले कार्यक्रम की शुरुआत में महोत्सव के संबंध में जानकारी देते हुए कला, संस्‍कृति एवं युवा विभाग के प्रधान सचिव चैतन्‍य प्रसाद ने कहा कि आज के समय में विश्‍व हिंसा के एक मुखर दौर से गुजर रहा है, जहां अभिव्‍यक्ति की स्‍वतंत्रता बाधित हो रही है. ऐसे में महात्मा गांधी के विचार और भी प्रासंगिक हो गए हैं. प्रसाद ने पूरे कार्यक्रम की रूप रेखा पर विस्‍तार से बात करते हुए कहा कि चंपारण सत्‍याग्रह के शताब्‍दी के अवसर पर सरकार प्रयासरत है कि गांधी जी के विचार लोगों तक, विशेषकर युवाओं तक पहुंचे. उन्‍होंने कहा कि इसी क्रम में कला, संस्‍कृति एवं युवा विभाग, बिहार ने फिल्‍मों के द्वारा महात्मा गांधी के विचारों के प्रसार कार्य करने का निश्‍चय किया है.

प्रसाद ने कहा कि यह फेस्टिवल पटना में 25-27 अप्रैल तक आयोजित हो रहा है. इसमें इंडियन इंफोटेन्मेंटमीडिया कार्पोरेशनमुख्‍य सहयोगी की भूमिका है. गांधी पेनोरमा फिल्‍म महोत्‍सव का आयोजन पटना के अलावा मुजफ्फरपुर, मोतिहारी, गया और हाजीपुर में भी किया जाएगा. इस दौरान महात्मा गांधी के जीवन और विचारों पर आधारित कुल 12 फिल्‍में दिखाई जाएंगी, जिनमें शॉर्ट फिल्‍म, डॉक्‍यूमेंट्री फिल्‍म और फीचर फिल्‍म शामिल हैं. इनमें ‘गांधी माई फादर’, ‘बापू ने कहा था’, ‘रोड टू गांधी’, क्षमा, मेकिंग ऑफ महात्‍मा गांधी, लगे रहो मुन्‍ना भाई, मैंने बापू को नहीं मारा, सेवाग्राम, महात्‍मा गांधी, साबरमती आश्रम, रोड टू संगम और विल महात्‍मा बोर्न अगेन’ शामिल हैं. समारोह में कला, संस्‍कृति एवं युवा विभाग के मंत्री शिवचंद्र राम, के अलावा शिशिर सिन्‍हा, चंचल कुमार, आंनद कुमार, उषा किरण खान व सुधा वर्गीज आदि उपस्थित रहे.

विरासत यात्रा को दिखाई हरी झंडी

मुख्‍यमंत्री ने इस दौरान विरासत विकास समिति द्वारा पूरे वर्ष आयोजित होने वाली विरासत यात्राओं के लिए बस को हरी झंडी दिखा कर रवाना किया. ये बस पटना, मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण और पश्चिमी चंपारण जिलों में महात्मा गांधी द्वारा भ्रमण किए गए स्‍थानों और चंपारण सत्‍याग्रह से संबंधित जगहों पर जाएगी. विरासत यात्रा की चर्चा करते हुए चैतन्‍य प्रसाद ने कहा कि यह यात्रा पटना, मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण और पश्चिमी चंपारण में आयोजित की जाएगी. यात्रा के दौरान प्रत्‍येक स्‍थल पर विरासत यात्रा का नेतृत्‍व प्रामाणिक इतिहासकारों और गांधीवादी चिंतकों द्वारा किया जाएगा. वहीं चंपारण सत्‍याग्रह का इतिहास, भारतीय स्‍वतंत्रता आंदोलन में इसका योगदान, चंपारण सत्‍याग्रह और गांधी से जुड़े हुए बिहार के स्‍थल और गांधी के दर्शन आदि के संबंध में परिचर्चा का भी आयोजन किया जाएगा. चंपारण सत्‍याग्रह शताब्‍दी विरासत यात्रा में शामिल सभी प्रतिभागियों के लिए गांधी टोपी, अल्‍पाहार, परिवहन की व्‍यवस्‍था और नि:शुल्‍क पंजीकरण की सुविधा होगी.

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क्षमा और द मेकिंग ऑफ द गांधी का प्रदर्शन

गांधी पैनोरमा फिल्‍म महोत्‍सव के अवसर पर आज अधिवेशन भवन में एक शॉर्ट फिल्‍म ‘क्षमा’ और एक डॉक्‍यूमेंट्री फिल्‍म ‘द मेकिंग ऑफ द गांधी’ का प्रदर्शित की गई. इस दौरान प्रथम दर्शक के रूप में खुद माननीय मुख्‍यमंत्री श्री नीतीश कुमार, विभाग के मंत्री श्री शिवचंद्र राम समेत अन्‍य पदाधिकारी व गणमान्‍य व्‍यक्तियों ने फिल्‍म देखी. जहां पहली दिखाई गई फिल्‍म क्षमा में गांधी जी के बचपन की कहानी है, जिसमें वे बड़े भाई को कर्ज से बचाने के लिए चोरी करते हैं. मगर यह चोरी उन्‍हें परेशान कर देती है और बाद में वे अपना गुनाह कबूलते हैं. फिर जा कर पिता को बता देते हैं, जहां उनके पिता मोहन दास की ईमानदारी देख उन्‍हें क्षमा कर देते हैं. 11 मिनट की इस फिल्‍म में गांधी जी की सत्‍य और अंहिंसा की राह पर चलने की शुरूआत को दिखाया गया है.

वहीं, ‘द मेकिंग ऑफ द गांधी’ की कहानी दक्षिण अफ्रीका में गांधी जी के दौरे व वहां किए गए सुधारों की है. फिल्‍म में युवा बेरिस्‍टर मोहन दास करमचंद गांधी को अप्रवासी होने के कारण नस्‍लवाद का का‍ शिकार होना पड़ता है. इस क्रम में वहां गोरे अंग्रेजों ट्रेन से समान सहित नीचे फेंक दिया जाता है. बाद में अंग्रेजों द्वारा उनकी पिटाई भी की जाती है. इसके बाद वे इन अत्‍याचारों के खिलाफ खड़े होने का साहस और अहिंसा की लड़ाई लड़ने का फैसला किया. श्‍याम बेनेगल ने महात्‍मा गांधी की जिंदगी पर ‘द मेकिंग ऑफ द गांधी’ फिल्‍म बनाई.

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