नीति आयोग की बैठक में PM से बोले नीतीश – बिहार आगे बढ़ रहा है, हमारा भी ख्याल रखें

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लाइव सिटीज डेस्क : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रविवार को देश की राजधानी दिल्ली में नीति आयोग के गवर्निंग बॉडी की तीसरी बैठक में भाग लिया. इस मौके पर उन्होंने एक बार फिर बिहार के लिए विशेष पॅकेज घोषित करने की जरुरत पर जोर दिया. उन्होंने 14वें वित्त आयोग की अनुशंसा से बिहार को होनेवाले नुकसान की भी चर्चा की.

इस दौरान नीतीश कुमार ने संघीय ढांचे में राज्यों की पहल एवं सहभागिता से समस्याओं के निराकरण एवं नीतियों के कार्यान्वयन में बेहतर समन्वय का माहौल पैदा करने में नीति आयोग की अग्रणी भूमिका निभाने की उम्मीद जताते हुए केंद्र प्रायोजित योजनाओं के युक्तिकरण पर चर्चा की. उन्होंने हर साल बिहार में बाढ़ के कारण होने वाले नुकसान और इसके कारण पड़ने वाले अतिरिक्त बोझ का हवाला देकर बिहार को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की बात कही. उन्होंने केन्द्रीय बजट में केन्द्र प्रायोजित योजनाओं में राज्यों को दी जाने वाली राशि में काफी कमी का बिहार पर पड़े प्रतिकूल प्रभाव का जिक्र किया और कहा कि वर्ष 2015-16 एवं 2016-17 में योजनाओं हेतु संसूचित बजटीय प्रावधान तथा वास्तविक प्राप्त राशि में काफी अंतर रहने पर चिंता जाहिर की.

नीतीश कुमार ने केंद्र सरकार द्वारा गठित रघुराजन समिति की अनुशंसाओं, जिसमें बिहार को देश के 10 सबसे पिछड़े राज्यों में चिन्हित किया गया था, का संदर्भ एवं विगत कई वर्षों में दोहरे अंक के विकास दर के बावजूद गरीबी रेखा, प्रति व्यक्ति आय, औद्योगीकरण और सामाजिक एवं भौतिक आधारभूत संरचना में राष्ट्रीय औसत से नीचे होने का हवाला देते हुए बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग रखी. साथ ही सर्वाधिक पिछड़े राज्यों के लिये केन्द्र प्रायोजित योजनाओं में केन्द्रांश के प्रावधान को 90 प्रतिषत करने की मांग रखी.

उन्होंने केंद्र प्रायोजित योजनाओं जैसे समेकित बाल विकास कार्यक्रम के तहत आंगनवाड़ी सेविका/सहायिका, मध्याह्न भोजन योजना के तहत रसोईया आदि द्वारा समय-समय पर मानदेय बढ़ाने की माँग एवं मांग पूरा न होने पर व्यापक विरोध एवं इस कारण योजनाओं के क्रियान्वयन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने का हवाला देते हुए उनके मानदेय के पुनरीक्षण एवं इसके वित्तीय भार का वहन केंद्र सरकार द्वारा करने की मांग रखी.

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मुख्यमंत्री ने बिहार सरकार द्वारा अनेक राज्य योजनाओं यथा- पोशाक योजना, साईकिल योजना आदि में सफलतापूर्वक प्रत्यक्ष नगद हस्तान्तरण और इसके सकारात्मक परिणाम का दृष्टांत देते हुए नीति आयोग से समेकित बाल विकास कार्यक्रम के अन्तर्गत पूरक पोषाहार कार्यक्रम एवं मध्याह्न भोजन योजना के विधिसम्मत वैकल्पिक क्रियान्वयन की संभावनाओं पर विचार करने का भी अनुरोध किया. राज्य सरकार द्वारा राज्य में व्यापक कौशल विकास कार्यक्रम हेतु स्थापित कौशल विकास मिशन को आगामी 5 वर्षों में 1 करोड़ युवाओं को प्रशिक्षित करने में कुल 12 हजार करोड़ रूपये की राशि के व्यय होने की संभावना बताते हुए विशेष केन्द्रीय सहायता की आवश्यकता पर बल दिया.

उन्होंने बिहार को खुले में शौच से मुक्त करने की प्रतिवद्धता दुहराते हुए सात निश्चय के अंतर्गत लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान को मिल रही कामयाबी का जिक्र किया और इसकी पूर्ण कामयाबी के लिए केंद्र से आर्थिक व अन्य जरूरी मदद की आवश्यकता बतायी. देश की अर्थव्यवस्था में कृषि का महत्वपूर्ण योगदान का उल्लेख करते हुए किसानों की आय को दोगुना करने संबं​धी उपायों के तहत निर्मित बृहत कृषि रोडमैप की कामयाबी एवं तदुपरांत आगामी पांच वर्षों के लिए नये कृषि रोड मैप के मद्देनजर संबंधित योजनाओं के लिए केन्द्र सरकार द्वारा समुचित वित्तीय सहयोग का अनुरोध किया.

भारत सरकार द्वारा पूर्वी भारत में हरित क्रांति नाम से चलायी जा रही एक योजना का बृहत रूप देने एवं इसके प्राथमिकता के आधार पर इसके मद में पर्याप्त वृृद्धि की मांग रखी. गरीबी उन्मूलन के लिए मुख्यमंत्री ने गरीबी आकलन की परिभाषा पर कोई सार्वभौमिक सहमति नहीं बन पाने पर चिंता जाहिर की और एक बहुआयामी गरीबी सूचकांक, गरीबी रेखा को परिभाषित करने का विकल्प सुझाया. उन्होंने गरीबी रेखा मापने की वर्तमान कार्यप्रणाली को दोषपूर्ण बताते हुए इसमें सुधार की आवश्यकता पर बल दिया.

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उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि विकास का लाभ समाज के सभी वर्गों को मिलना, विशेषकर कमजोर वर्गों जिसमें अत्यधिक गरीब हैं, को सशक्त एवं सक्षम बनाना सुनिश्चित होना जरूरी है. इसी तरह सभी राज्यों और क्षेत्रों का संतुलित विकास के बगैर संपूर्ण राष्ट्र का विकास अपूर्ण रहने की बात कही और एतदर्थ विशेष सहायता देने की बात दुहराई. उन्होंने कहा कि एक ओर कई राज्यों का तेजी से विकास हुआ हैं, वहीं कई अन्य राज्य अभाव से ग्रसित रहे हैं. केन्द्र सरकार के प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष अनुदानों का सर्वाधिक लाभ विकसित राज्यों को ही मिलता है. बिहार जैसे राज्यों को इसका भारी खामियाजा भुगतना पड़ा है. इस पर ध्यान दिए जाने की आवश्यकता बताई.

नीतीश ने यह विशेष रूप से उल्लेख किया कि भारत की जनसंख्या का आठ प्रतिशत आबादी वाला बिहार का योगदान राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद में केवल 3 प्रतिशत है. पिछले 10 वर्षों में बिहार ने तीव्र आर्थिक विकास करते हुए दो अंकों का विकास दर हासिल किया है. इसलिए हमारे हालिया प्रदर्शन को ध्यान में रखते हुए अब उपयुक्त समय आ गया है कि हमारे विकास के प्रयासों को सक्षम नीतियों के माध्यम से समर्थन एवं प्रोत्साहन प्रदान किया जाय.

मुख्यमंत्री ने सामाजिक एवं आर्थिक रुप से पिछड़े राज्य गत वर्षों में तेजी से प्रगति करने के बावजूद भी विकास के सामाजिक एवं आर्थिक मानकों पर राष्ट्रीय औसत से पीछे होने का जिक्र किया और सुझाव दिया कि सभी प्रक्षेत्रों में विकास के विभिन्न मापदंडों पर राज्यों की जरूरतों का आकलन करने के उचित अवसर के आलोक में प्रत्येक प्रक्षेत्र के लिए विकास की रणनीति का मसौदा तैयार किया जाय ताकि पिछड़े राज्यों को कम से कम सभी सूचकांकों के राष्ट्रीय औसत पर लाया जा सके.

उन्होंने प्रधानमंत्री का ध्यान बिहार सरकार द्वारा विगत वर्षों में उठाए गए कई तरह के परिवर्तनकारी कदमों की ओर आकृष्ट किया एवं सुशासन के कार्यक्रम, विकसित बिहार के सात निश्चय, बिहार विकास मिशन का गठन, आपदा जोखिम न्यूनीकरण रोड मैप (2015-30), महिला स्वयं सहायता समूहों का जीविका कार्यक्रम, सभी सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 35 प्रतिशत आरक्षण, नागरिकों के सशक्तिकरण हेतु लोक सेवा अधिनियम तथा लोक शिकायत निवारण अधिनियम आदि जैसी अनेक पहलों का जिक्र किया.

नीतीश ने बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू कर सामाजिक परिवर्तन की बुनियाद रखने की बात कही और इसके कारण नागरिकों के स्वास्थ में बेहतरी, परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार, पारिवारिक हिंसा, घरेलू कलह एवं सामाजिक अपराध में कमी आने का उल्लेख किया और चम्पारण सत्याग्रह के सौवें साल में इसे राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि बताया और उम्मीद जताया कि भारत एवं बिहार राज्य के लिए दृष्टिपत्र बनाते समय उपर्युक्त वर्णित सभी मुद्दों एवं सुझावों पर सम्यक विचार किया जायेगा

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