मंत्री मस्तान : बूचड़खाना खोलना हमारा अधिकार,रोक लगाने वाले पशुपालन मंत्री कौन?

पटना : बिहार के उत्पाद एवं मद्य निषेध मंत्री अब्दुल जलील मस्तान ने अपने बयान से एक बार फिर विवाद खड़ा कर दिया है. उन्होंने कहा है कि बिहार में एक भी अवैध बूचड़खाना नहीं है. सारे बूचड़खाने सरकार के नियमों के अनुसार खुलते हैं. साथ ही उन्होंने यह भी कह दिया कि बूचड़खाना खोलना हमारा संवैधानिक अधिकार है.

मस्तान के इस बयान पर विवाद इसलिए भी बढ़ गया क्योंकि ऐसा कहकर उन्होंने अपनी ही सरकार के मंत्री की बात काट दी. दरअसल बिहार विधानसभा में एक सवाल के जवाब में पशुपालन मंत्री अवधेश प्रसाद सिंह ने पिछले दिनों कहा था कि राज्य में अवैध बूचड़खाने बंद होंगे. उन्होंने कहा कि भाजपा बूचड़खाना के नाम पर देश को गुमराह कर रही है. विधान परिषद में बजट पर विभाग का पक्ष रखते हुए शनिवार को उन्होंने कहा कि सरकार पशु संरक्षण एवं उसके विकास के लिए गंभीर है.

पशुपालन मंत्री के इसी बयान पर मद्य निषेध मंत्री अब्दुल जलील मस्तान ने कहा कि बूचड़खाना खोलना हमारा संवैधानिक अधिकार है. पशुपालन मंत्री इसे कैसे बंद करा सकते हैं. मस्तान के इस बयान पर सियासत गर्म होनी थी, सो हुई. एक ओर जहां उनकी पार्टी ने अपने मंत्री के बयान पर कुछ बोलने से इंकार कर दिया, वहीँ दूसरी ओर भाजपा नेता भड़क गए. भाजपा ने इसे बिहार सरकार का दोहरा चरित्र बताया है. पार्टी ने कहा कि मस्तान का यह बयान बिहार सरकार के दोहरे चरित्र को उजागर कर रहा है. एक ओर पशुपालन मंत्री अवैध बूचड़खाने को बंद करने की बात कहते हैं तो दूसरी ओर एक मंत्री उसे अपना संवैधानिक अधिकार बताते हैं.

इसी मामले में गुरुवार को बिहार विधान परिषद् में भी हंगामा हुआ. भाजपा और अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने  मस्तान के जवाब का बहिष्कार किया और सदन से वाकआउट कर गए.

बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब अब्दुल जलील मस्तान ने विवादास्पद बयान दिया है. इससे पहले उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी टिप्पणी की थी जिसपर सदन में कई दिनों तक विवाद हुआ था.

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