19 साल बाद अलकतरा घोटाले में आया फैसला

पटना : इसे हमारी न्याय व्यवस्था की लाचारी मानिए या फिर अनुसंधान मे देरी. वजह चाहे जो भी हो. लेकिन, 1997 में दर्ज एक मुकदमे के आरोपी 19 सालों के बाद दोषी सिद्ध हुए हैं. हम बात कर रहे हैं सूबे के बहुचर्चित अलकतरा घोटाले की. सीबीआई की विशेष अदालत ने बुधवार को अलकतरा घाटोले के आरोपी एसपीसीएल के तत्कालीन क्लर्क पी के गुप्ता और ठेकेदार केके केडिया को दोषी मानते हुए तीन-तीन सालों की सजा सुनाई है. गुप्ता पर 15 लाख रुपये का जुर्माना जबकि केडिया पर 60 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है. सीबीआई के विशेष न्यायाधीश सर्वजीत ने मामले में दोषियों को सजा सुनाई है.

सहरसा में हुआ था अलकतरा घोटाला, आरोपी इंजीनियर को दोषी सिद्ध कर पाने में असफल रही सीबीआई

राज्य के चर्चित अलकतरा घोटाला सहरसा से जुड़ा था. मामले की जांच सीबीआई कर रही थी. तत्कालीन क्लर्क पी के गुप्ता और ठेकेदार केके केडिया के अलावा सहरसा पथ निर्माण विभाग के कनीय अभियंता रामचंद्र सिंह को भी आरोपी बनाया गया था. लेकिन, अदालत ने रामचंद्र सिंह को बरी करार दिया. सीबीआई रामचन्द्र सिंह के खिलाफ लगे आरोपों को साबित करने में असफल रही.

सीबीआई ने आरोपित रामचन्द्र सिंह के साइट एकाउंट रजिस्टर को जब्त किया था, लेकिन अभियोजन की ओर से उक्त रजिस्टर को अदालत के समक्ष प्रस्तुत नहीं किय जा सका. इससे इस बात का पता नहीं चला कि कितना अलकतरा प्राप्त किया गया, कितना प्रयोग किया गया और कितना शेष बाकि रह गया था.

जाली व फर्जी कागजात बनाकर किया गया था घोटाला

वर्ष 1996-97 के दौरान पथ निर्माण विभाग के तहत सहरसा में हुए काम के दौरान बड़े पैमाने पर घोटाला हुआ था. 1997 में मामले का खुलासा हुआ था. आरोपितों ने एक आपराधिक षड्यंत्र करते हुए जाली व फर्जी कागजात बना कर बड़े पैमाने पर 1 करोड़ 83 लाख रुपए का घोटाला किया था.मामले में सीबीआई ने 1997 में प्राथमिकी दर्ज कर अनुसंधान किया और फिर आरोपियों के खिलाफ विशेष अदालत में चार्जशीट दायर की थी.

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