अखबार के कतरनों के आधार पर लोकहित याचिका दर्ज करने से कोर्ट का इनकार

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फाइल फोटो

पटना (एहतेशाम) : हाइकोर्ट ने आधी अधूरी जानकारी और समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों के कतरन को आधार बनाकर दायर किये जाने वाले मामलों को लोकहित याचिका मानने से इनकार कर दिया है. मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन एवं न्यायाधीश सुधीर सिंह के खण्डपीठ ने अनिल शाही एवं अन्य की ओर से दायर लोकहित याचिका पर सोमवार को सुनवाई करते हुए उक्त निर्देश दिया.

मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि राजधानी पटना सहित सूबे के सभी जिलों में जुगाड गाडी का व्यवसायिक उपयोग किया जा रहा है. इसके लिए न तो उन लोगों द्वारा कोइ लाइसेंस लिया गया है और न ही कोई परमिट. अदालत को इस संबंध में विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों के कतरन भी दिखाये गये. अदालत ने सभी पक्षों को सुनने के बाद ऐसी आधी अधूरी जानकारी और अखबारों में प्रकाशित खबरों के कतरनों के आधार पर दायर मामलों को लोकहित याचिका मानने से इनकार करते हुए याचिका को खारिज कर दिया.

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विधिक सेवा प्राधिकार को नोटिस
उधर दूसरे मामले में सूबे में वृद्धा आश्रम के निर्माण करने की मांग करने वाली लोकहित याचिका पर पटना उच्च न्यायालय ने मामले में विधिक सेवा प्राधिकार को प्रतिवादी बनाने का निर्देश याचिकाकर्ता को देते हुए नोटिस जारी करने का निर्देश दिया. मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन एवं न्यायाधीश सुधीर सिंह के खण्डपीठ ने सिविल सोसायटी की ओर से दायर लोकहित याचिका पर सुनवाई करते हुए उक्त निर्देश दिया. मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि सूबे में बेसहारा वृद्धों के आश्रय हेतु वृद्धा आश्रम का निर्माण किया जाना है. अदालत को बताया गया कि राजधानी पटना पूर्णिया एवं गया में वृद्धा आश्रम के निर्माण हेतु राशि भी विमुक्त किया जा चुका है. बावजूद इसके अभी तक इसके निर्माण कार्य शुरु होने की दिशा में कोई प्रगति नहीं हुई है. अदालत को यह भी बताया गया कि किसी भी राज्य में वृद्धा आश्रम के निर्माण हेतु नालसा की योजना अनुसार ही कार्य किया जाना है.

एम्स पर केंद्र से जवाब तलब
उधर दूसरे मामले में राजधानी से सटे फुलवारीशरीफ में स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स में 24 घंटा आकस्मिक सुविधा उपलब्ध कराने की मांग वाली लोकहित याचिका पर पटना उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार से जवाब तलब किया है. मामले की अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद होगी. मुख्य न्यायाधीश राजेन्द्र मेनन एवं न्यायाधीश सुधीर सिंह के खण्डपीठ ने देविका विश्वास की ओर से दायर लोकहित याचिका पर सोमवार को सुनवाई करते हुए उक्त निर्देश दिया. मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि राजधानी पटना से महज आठ किलोमीटर पश्चिम मे स्थित फुलवारीशरीफ में एम्स की स्थापना इस उद्देश्य के साथ की गयी थी कि राजधानी सहित बिहार के लोगों को चौबीसों घंटा समुचित एवं अच्छी चिकित्सा सुविधा मिलेगी, परंतु अस्पताल उन उद्देश्यों को पूरा करने में विफल रहा है. यहां तक कि अस्पताल आमजनों को 24 घंटा आकस्मिक सेवा देने में भी विफल हो रहा है. जिस कारण आमजन आकस्मिक समय में इलाज नहीं मिल पाने के कारण मर रहे हैं.

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