बिहार सरकार की पहल, अब गायें जन्म देंगी सिर्फ बछिया, दूध का उत्पादन बढ़ेगा

(लाइव सिटीज डेस्क): आमलोगों में बेटे की चाहत ज्यादा देखने को मिलती है. गैरकानूनी होने के बावजूद अल्ट्रासाउंड के जरिये गर्भस्थ शिशु के लिंग का पता करना और कन्या भ्रूण की हत्या इसी चाहत की परिणति है. लेकिन यहां बात पशुपालन की है. पशुपालक विशेष रूप से दुग्ध उत्पादन के लिए पशुपालन करने वाले इसकी उलट सोच रखते हैं.

नर बछड़ा को कोई रखना नहीं चाहता. मादा बछड़ा की चाहत सभी रखते हैं. दरअसल होता यूं है कि लोग नर बछड़े को यूं ही लावारिश छोड़ देते हैं. ये बछड़े या तो यूं ही सड़कों पर भटकते रहते हैं या फिर बुचड़खानों में पहुंचा दिए जाते हैं. बिहार सरकार कृत्रिम गर्भाधान के जरिये राज्य में गाय भैसों की संख्या को बढ़ाने की योजना पर काम करने जा रही है.

वर्तमान वित्तीय वर्ष में ही सूबे के छह जिलों में एक पायलट परियोजना शुरू की जा रही है जिसमें सरकार पशुपालक किसानों को अपनी गायों के लिए विशेष गर्भधारण विधि अपनाने के लिए 45 प्रतिशत सब्सिडी की पेशकश कर रही है. ‘सॉर्टेड सीमेन स्ट्रॉ’ विधि दरअसल केवल मादा बछड़ों का जन्म सुनिश्चित किया जा सकता है. इस परियोजना के लिए जो गाएं चुनी जा रही हैं उसमें इस बात का ध्यान रखा जा रहा है कि गाएं पहली बार गर्भधारण करने जा रही हों.

विशेषज्ञों कादावा है कि ‘सॉर्टेड सीमेन स्ट्रॉ’ विधि के जरिए 90 प्रतिशत तक सफलता प्राप्त की जा सकती है. इसे निश्चित तौर पर सफलता का बेहतर प्रतिशत माना जाएगा. विशेषज्ञों के मुताबिक? प्रत्येक साल तकरीबन 25—26 लाख गाएं कृत्रिम गर्भाधान से गुलरती हैं और इसमें नर—मादा बछड़ों की संभावना आधी—आधी देखने को मिलती है. पशुपालक किसानों में नर बछड़ों के प्रति उदासीनता देखने और आवारा पशुओं की बढ़ती संख्या के बाद सरकार ने यह निर्णय लिया है.

इससे एक तो खेतों में लगी फसलों को बर्बाद करने वाले आवारा पशुओं की संख्या में स्वत: कमी आ जाएगी. साथ ही, सूबे में दुग्ध उत्पादन में बढोतरी होगी और दुग्ध पर आधारित वस्तुओं के उत्पादन में भी इजाफा होगा. पशुपालकों की आमदनी बेहतर होगी और जीवन स्तर में सुधार होगा. आमतौर पर होता यह है कि लोग आवारा सांढ़ या बैल को अपनी गाय—भैसों के प्रजनन के लिए इस्तेमाल करते हैं. इससे जो संतति होती है उसमें कई संक्रमण भी आ जाते हैं और उसकी सेहत सही नहीं रहती है. दुग्ध उत्पादन क्षमता भी इससे प्रभावित होती है.

 

बिहार पशुपालन और मत्स्यपालन मंत्री अवधेश कुमार सिंह के मुताबिक, “यह योजना सीधे दूध उत्पादन और आवारा भटकने वाले पशुओं से संबंधित है. इसलिए आवारा भटकने वाले गाय— बैलों की देखभाल के लिए समुचित बुनियादी ढांचा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भी एक अलग योजना पर काम चल रहा है. इस योजना के लिए अपनाई जा रही ‘सॉर्टेड सीमेन स्ट्रॉ’ विधि  का पहले ही दो—तीन राज्यों में सफलतापूर्वक परीक्षण हो चुका है और इसके बेहतर परिणाम देखने को मिले हैं.”

BAIF Development and Research Foundation हर पंचायत में पशुपालक किसानों को सॉर्ट किए गए सीमेन वीर्य प्रदान करेगी. इसमें किसानों को 55 फीसदी लागत आएगी, बाकी का खर्च सरकार उठाएगी. पायलट प्रोजेक्ट के लिए जिन छह जिलों का ख्यन किया गया है उनमें नालंदा, भोजपुर (आरा), सारण (छपरा), गोपालगंज, बक्सर और गया शामिल हैं. 2017-18 और 2018-19 में कार्यान्वयन के पश्चात परियोजना की कामयाबी के आधार पर इसे अन्य जिलों में भी दोहराया जाएगा. पशु और मत्स्य विभाग ने आगामी दो सालों में 40,000 गायों के कृत्रिम गर्भधारण का लक्ष्य रखा है. इसके लिए सरकार 2.20 करोड़ रुपये सब्सिडी में खर्च करने जा रही है. यानी आने वाले समय में सूबे में दूध की नदियां बहे यान बहे, जरूरतमंदों को दूध की कमी हरगिज महसूस नहीं होगी. यह उम्मीद की जानी चाहिए.

 

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