बिहार में फिल्‍मों की जड़ें गहरी : हिमांशु कटुआ  

पटना :  ‘फिल्‍म महोत्‍सव तो बहुत जगहों पर हाेते हैं लेकिन ऐसे थीम बेस्‍ड रीजनल फिल्‍म फेस्टिवल का आयोजन बताता है कि बिहार में फिल्मों की जड़ें कितनी गहरी हैं. आज जब ग्‍लोबल युग में लोग अपने राज्‍य को छोड़कर दूसरे राज्‍य जाते हैं, तब वो दूसरे राज्‍य के समाज और कल्‍चर से अनिभिज्ञ होते हैं. इस मायने में फिल्‍म ही ऐसा माध्‍यम हैै, जिसकेे जरिए दो राज्‍यों के बीच सामाजिक, सांस्‍कृतिक और आर्थिक जानकारियां मिल पाएंगी’. बिहार राज्‍य फिल्‍म डेवलपमेंट वित्त निगम लिमिटेड द्वारा आयोजित रीजनल फिल्‍म फेस्टिवल 2016 के दौरान प्रसिद्ध ओडिया फिल्‍म निर्देशक हिमांशु कटुआ ने ये बातें कहीं. आपको बता दें कि पटना के रवीन्द्र भवन में आयोजित इस फिल्म फेस्टिवल के चौथे दिन ओड़िया फिल्में दिखाई गईं.

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स्कूली बच्चों ने देखी क्लासिकल ओड़िया फिल्में

छह दिनों तक चलने वाले रीजनल फिल्‍म फेस्टिवल 2016 के चौथे दिन की शुरुआत सुशांत मिश्रा निर्देशित फिल्‍म विश्‍वप्रकाश से हुई. जो एक ब्राह्मण पृष्‍ठभूमि से आने वाले लड़के की कहानी है. जो पढ़ने – लिखने केे बजाय मछली व्‍यवसाय को चुनता है और फिर पारिवारिक और सामाजिक अंतर्विरोध का दौर चलता है. इसके बाद दूसरी फिल्‍म डॉ सब्‍यसाची महापात्रा निर्देशित और अटल बिहारी पांडा अभिनीत फिल्म आदिम विचार और अंत में हिमांशु कटुआ की फिल्म क्रांतिधारा का प्रदर्शन हुआ. ओडिया की तीनों फिल्‍में दर्शकों को बहुत पसंद आई. खास तौर पर स्कूली बच्चों ने इन फिल्मों का आनंद लिया.

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ओड़िया फिल्म जगत से जुड़ी हस्तियों ने रखी आपनी बात

फिल्‍में दिखाने के ओपेन हाउस डिसकशन सत्र में  ओडिया से आए निर्देशकों और अभिनेताओं ने लोग से फिल्‍म एवं अन्‍य विषयों पर विस्‍तार से चर्चा की. इस दौरान बिहार राज्‍य फिल्‍म डेवलपमेंट वित्त निगम लिमिटेड के एमडी गंगा कुमार, अटल बिहारी पांडा (अभिनेता, आदिम विचार), डॉ सब्‍यसाची महापात्रा (निर्देशक, आदिम विचार), समरेश राउत्रे ( अभिनेता, क्रांतिधारा), हिमांशु कटुआ (निर्देशक, क्रांतिधारा),  सुसांत मिसरा (निर्देशक, विश्‍वप्रकाश), पूर्व आईएएस आर एन दास, रविराज पटेल, फिल्‍म समीक्षक विनोद अनुपम, कमल नोपाणी, राजेश बजाज, मीडिया प्रभारी रंजन सिन्‍हा, सर्वेश कश्‍यप आदि लोग मौजूद रहे है. पूर्व आईएएस आर एन दास ने सभी आगंतुकों को बुके, शॉल और स्‍‍मृति चिन्‍ह देकर सम्‍मानित किया.

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कहानी के हिसाब से बनती हैं फिल्में
निर्देशक डॉ सब्‍यसाची महापात्रा रीजनल फिल्‍म फेस्टिवल 2016 पर चर्चा करते हुए कहा कि कहानी के डिमांड के हिसाब से फिल्‍में बनती है. 20 साल पहले तक ओडिसा में भी क्षेत्रीय फिल्‍मों का चलन था. मगर कुछ वजहोंं से ओडिसा में अब ऐसे आयोजन नहीं हो पा रहे हैं। हालांकि ओडिसा में का कल्‍चर बहुत रीच रहा है.  1936 के बाद आज त‍क ओडिया सिनेमा अलग – अलग दौर से गुजरा एक सवाल के जवाब में डॉ महापात्रा ने कहा कि मैं मेरी फिल्‍मों में इमोशनल टच इसलिए होता है, क्‍योंकि मैं महिलाओं और समाज के अन्‍य संवदेनशील मुद्दे पर सिनेमा बनाता हूं.

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