दलहनी फसलों में लग रहा सूखा रोग, किसान चिंतित

पटना : दाल का कटोरा कहा जाने वाले मोकामा टाल में दलहनी फसलों में बीमारियां होने लगी हैं. जलजमाव के कारण इस बार वैसे भी दलहनी फसलों की बुआई काफी देर से हुई है और देर से फसलों की बुआई होने के बाद किसानों के सामने एक नई समस्या आ गई है.

दरअसल फतुहा से बड़हिया तक फैले मोकामा टाल में दलहनी फसलों की खेती व्यापक पैमाने पर की जाती है और इसे दाल का कटोरा कहा जाता है. टाल के कुल क्षेत्रफल के 80 फीसदी से अधिक भाग में मात्र एक फसल होती है और दलहनी फसल ही किसानों की रोजी रोटी का एक मात्र सहारा है. देर से फसल की बुआई हुई और जरुरत से ज्यादा नमी रहने के कारण फसलों में कॉलर रॉट की समस्या देखी जा रही है.

पौधा संरक्षण विभाग पटना के प्रमंडलीय उप निदेशक देवनाथ प्रसाद ने लाइव सिटीज को बताया कि जमीन में जब जरूरत से ज्यादा नमी होती है तो चना और मसूर के पौधों में कॉलर रॉट की समस्या देखने को मिलती है. कॉलर रॉट से ग्रसित पौधों में पत्तियां पीली होने लगती हैं तथा जड़ का उपरी हिस्सा और पौधे का तना वाला भाग सड़ने लगता है. तना का भाग सड़ते ही वह पौधा भी पूरी तरह से सूख जाता है.

पटना प्रमंडल उप निदेशक देवनाथ प्रसाद ने बताया कि टाल में कई जगहों पर कॉलर रॉट की समस्या के लक्षण मिले हैं जिनका उपचार किसानों को बताया गया है. बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर के अनुसंधान निदेशक जे बी तोमर ने लाइव सिटीज को बताया कि कॉलर रॉट की समस्या को लेकर मोकामा टाल के किसानों ने शिकायत की थी और किसानों को कुछ दवाई बताई गई है. उन रसायनिक पदार्थों के छिड़काव का की सलाह दी गई है.

बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर के निदेशक अनुसंधान डॉ. जे बी तोमर ने बताया कि किसानों को कार्बेंडाजिम के छिड़काव की सलाह दी गई है. कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि वे लोग लगातार मोकामा टाल के किसानों के संपर्क में है तथा जरूरत पड़ने पर किसानों की मदद की जाएगी.

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