डॉक्टर को लिखनी होंगी जेनेरिक दवा, मोदी सरकार जल्द बनाएगी कानून

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लाइव सिटीज डेस्क : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने दो दिन के गुजरात दौरे के दौरान सूरत में किरण मल्टी सुपर स्पेशिएलिटी हास्पिटल एंड रिसर्च सेंटर का उद्घाटन किया है और इस दौरान देश को सस्ते इलाज मुहैया कराने का दावा किया, साथ ही जेनेरिक दवाइयों के इस्तेमाल पर जोर दिया. तो चलिए जानते हैं क्या होती हैं जेनेरिक दवाएं. बाकी दवाओं से ये कैसे अलग हैं. साथ ही ये भी बताएंगे कि इससे इलाज कैसे सस्ता हो सकता है और ये क्यों सस्ती मिलती हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बात पर विशेष जोर दे रहे हैं कि डॉक्टर्स को जेनेरिक दवाएं प्रीस्क्रिप्शन में लिखनी चाहिए. इससे इलाज सस्ता होगा. दरअसल, जेनरिक दवाइयां सस्ती होती हैं, दवाइयों का खर्चा इससे कम आएगा और कुलमिलाकर इलाज सस्ता हो जाएगा.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मश्वरा :
प्रधानमंत्री ने डॉक्टरों को भी जेनेरिक दवाओं को प्रेस्क्राइब करने की हिदायत दी ताकि इससे इलाज सस्ता हो सके. इन दवाओं का असर भी कम नहीं बल्कि महंगी दवाओं जितना ही होता है. ऐसे में हर किसी को जेनेरिक दवाओं का ही सेवन करना चाहिए.

कैसे बनती हैं जेनेरिक दवाएं :
किसी भी बीमारी के ऊपर रिसर्च कर उसकी दवाईंयां बनाई जाती है और इस दवाई को साल्ट कहा जाता है. ये साल्ट दुनिया भर में एक ही नाम का होता है बस इसे बनाने वाली कम्पनी इसका अलग नाम और दाम लगाकर बेचती हैं. इस वजह से महंगी दवाई और जेनेरिक दवाई में कोई फर्क नहीं होता.

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जेनेरिक दवाई की दुकानें :

ज़्यादातर हर बड़े शहर में जेनेरिक दवाओं की दुकाने होती हैं लेकिन इसके बावजूद भी लोगों को इसकी जानकारी नहीं होती और वो एमर्जेन्सी में महंगी दवाइयां ही खरीद लेते हैं. इन दुकानों का प्रचार करना बेहद ज़रूरी है. इन दवाओं की पब्लिसिटी न हो पाने के वजह से सस्ती तो हैं लेकिन इनके बारे में बहुत कम लोगों को पता है.

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सत्यमेव जयते : 

आमिर खान के जागरूक शो सत्यमेव जयते में भी एक एपिसोड इन्ही जेनेरिक दवाओं पर किया गया था जिसके बाद काफी लोगों को इन दवाओं की जानकारी हुई. कई लोगों ने माना कि जेनेरिक दवाओं के बारे में उन्हें इसी शो से पता चला.

सरकार का हस्तक्षेप :
जेनेरिक दवाओं के दाम कम इसलिए भी होते हैं क्यूंकि इसके दाम तय करना सरकार के हाथ में होता है जिससे की इनकी मनमानी वाले दाम नहीं लगते. इन दवाओं के प्रचार न होने के वजह से भी इनके दाम कम हैं. हालांकि जेनेरिक दवाओं की क्वालिटी बाकि दवाइयों की तरह ही होती है और इन्हे भी कड़े परीक्षणों से गुज़रना पड़ता है.

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