ज्योतिषियों और टैरों रीडरों द्वारा चुनाव नतीजों की भविष्यवाणी कराने पर भी रोक

लाइव सिटीज डेस्क : भारतीय निर्वाचन आयोग ने चुनावों के दौरान एग्जिट पोल के साथ ही नतीजों को लेकर किसी भी तरह की भविष्‍यवाणी वाले कार्यक्रमों के प्रसारण पर भी रोक लगा दिया है. निर्वाचन आयोग ने मीडिया संगठनों को भेजे एक संदेश में यह बात कही है. इसमें कहा गया है कि जब एग्जिट पोलों के नतीजों को दिखाने पर पाबंदी है, तो ऐसे समय में ज्योतिषियों और टैरों रीडरों की ओर से चुनावी नतीजों की भविष्यवाणी करना कानून का उल्लंघन है.

इसी आधार पर सभी न्यूज़ चैनलों और अखबारों को जारी निर्देश में चुनाव आयोग की ओर से अधिसूचित की गई अवधि के दौरान प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के जरिए कोई भी एग्जिट पोल नहीं करने और न ही इसको लेकर किसी तरह के अनुमान वाले कार्यक्रमों को प्रसारित करने को कहा है. यह निर्णय देते हुए आयोग ने जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 126-ए का भी जिक्र किया है.

निर्वाचन आयोग के इस निर्देश का मकसद पिछले कुछ चुनावों में कई समाचार चैनलों द्वारा स्‍टूडियो में ज्‍योतिषियों और टैरो कार्ड रीडर्स को बुलाकर उनसे चुनाव के विजेता के बारे में भविष्‍यवाणी कराने से रोकना है. आयोग के संदेश में कहा गया है कि ऐसा देखा गया है कि कुछ टीवी चैनलों ने ऐसे कार्यक्रम प्रसारित किए जिनमें राजनीतिक पार्टियों की ओर से जीती जा सकने वाली सीटों की संख्या बताई गई. यह उस वक्त किया गया जब एग्जिट पोलों पर प्रतिबंध की अवधि लागू थी. आयोग का मानना है कि ज्योतिषियों, टैरो रीडरों, राजनीतिक विश्लेषकों या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा प्रतिबंध की अवधि के दौरान किसी भी स्वरूप या तरीके से चुनावी नतीजों की भविष्यवाणी करना धारा 126-ए का उल्लंघन है.

बता दें कि हालिया संपन्न उत्तर प्रदेश चुनावों के दौरान प्रमुख अखबार दैनिक जागरण के वेब-पोर्टल ने यूपी का एग्जिट पोल समय से पहले ही प्रकाशित कर दिया था. 11 फरवरी को यूपी के पहले चरण के विधानसभा चुनाव के बाद शाम को दैनिक जागरण की वेबसाइट पर एग्जिट पोल पोस्ट किया गया था. एग्जिट पोल में अन्य पार्टियों पर भाजपा की बढ़त दिखाई गई थी. सर्वे में दूसरे नंबर पर बसपा और तीसरे नंबर पर सपा-कांग्रेस के गठबंधन को दिखाया गया था.

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