‘चमत्कारी बाग’ फलदार पेड़ लगाने से होती है संतान प्राप्ति

लाइव सिटीज डेस्क : पटना साहिब गुरुद्वारा से तीन किलो मीटर की दूरी पर दीदारगंज इलाके में स्थित गुरु का बाग़ जिसे चमत्कारी बाग़ कहते हैं, इस बाग़ में सभी धर्म के लोग दूर- दूर से आते हैं और यहां के तालाब में स्नान करते हैं. इस चमत्कारी बाग़ की मान्यता है कि जो भी किसी बीमारी से पीड़ित रहते हैं, वे यहाँ के तालाब में स्नान करते हैं और उन्हें सभी रोगों से मुक्ति मिलती है. साथ ही निःसंतान लोग अपनी पुत्र की कामना लेकर आते हैं और यहां के बाग़ में कोई फलदार पेड़ लगाते हैं  तो उन्हें संतान की प्राप्ति होती है.
चमत्कारी बाग़ की पौराणिक मान्यता है कि यहां सिखों के नौवें गुरु तेग बहादुर जी महाराज आसाम से लौटने के बाद बैशाख महीना के सप्तमी के दिन यहां के सूखे बाग़ में आ कर अपना पड़ाव डाले थे. उनके चरण पड़ते ही बाग़ पूरी तरह हरी भरी हो गई थी, जिसकी सूचना उस बाग़ के राजा ‘करीम बक्स रहीम वक्स’ को मिली और चमतकारी गुरु महाराज से मिलने चले आयें. राजा ने गुरु तेग बहादुर जी महाराज को बताया की इस बाग़ में संत आये थे, जिनका अपमान उनके द्वारा किया गया था, संत का अपमान होने पर उन्होंने श्राप दिया, जिसके कारण बाग़ सूख गये और उनकी पत्नी कोढ़ जैसे बीमारी से पीड़ित हो गई.
गुरु महाराज के आग्रह पर राजा अपनी पत्नी को बाग़ में लाये, जहाँ गुरु महाराज ने वहां स्थित कुआँ के पानी से स्नान कर बाग़ में एक फलदार पेड़ लगाने को कहा, गुरु की बात पर राजा की पत्नी ने वैसा ही किया, जिससे राजा की पत्नी को कोढ़ की बीमारी से मुक्ति मिली और उसे संतान की भी प्राप्ति हुई थी.
बताया जाता है की गुरु तेग बहादुर जी महाराज पटना साहिब जिसे ‘बिशम्भरपुर’ के नाम से जाना जाता था. वहां के रहने वाले शालस राय जौहरी के हवेली में अपनी गर्भवती पत्नी माता गुजरी को छोड़ कर दो राजाओ के बीच हो रही लड़ाई को सुलझाने असम गए थे, जहां से आने के बाद उसी बाग़ में पत्नी गुजरी अपने पुत्र गुरु गोविन्द सिंह जी को लेकर गुरु तेग बहादुर जी से मिलने पहुंची थी. इस पौराणिक मान्यता के अनुसार श्रद्धालु महिलाएं  वैशाख महीना के सप्तमी के दिन को अपनी संतान की इच्छा लिए इस बाग़ में आती हैं स्नान कर बाग़ में फलदार पेड़ खरीद कर लगाती हैं.

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