पहली ही रात बीवी बोली- आप मुझे पसंद नहीं

पटना : तीन तलाक बोला और हो गया तलाक. सात जन्‍म तक साथ में रहने की कसम पल भर में एक झटके के साथ खत्‍म. कौन किस हाल में है यह जानने का अधिकार भी नहीं रहा. खत्‍म हो गये सारे वादे. टूट गये दुल्‍हन के सपने. लेकिन,  फुलवारीशरीफ में एक नये जोड़े ने आपसी सहमति से समाज के सामने एक मिसाल पेश की है. नयी नवेली दुल्‍हन को सपने का राजकुमार नहीं मिला, तो उसने इस बात का इशारा पहली रात में ही कर दिया और अपने शौहर से अलग रहने का संदेश भी दे दिया. शौहर ने भी उसकी बात को समझा और अलग चला गया.

हालांकि उसने लगातार 15 दिनों तक इस बात का प्रयास किया किया कि बीवी को समझा बुझा कर नयी जिंदगी का शुरुआत की जाये, मगर यह संभव नहीं हुआ और पति-पत्‍नी ने पूरी तरह शरीयत के हिसाब से एक घर में एक छत के नीचे तीन माह गुजार कर जीवन भर के लिए अलग हो गये. लड़के ने लड़की के भाई से कहा, आप की बहन जिस प्रकार पवित्र आयी थी, उसी प्रकार पवित्र भेज रहा हूं. हां, मैंने जो विवाह में इसको जेवरात दिया था, वह भी साथ में दे दे रहा हूं, मगर आप से विनती है कि इसका इसके इच्‍छा अनुसार लड़का खोज कर विवाह कर दें. यह रही इसके मेहर की रकम. इसके बाद पूरे सम्‍मान के साथ लड़की को उसने घर से विदा कर दिया. विदाई के समय जब लड़का पक्ष वालों ने लड़की के भाई से माफी मांगी, तो उन लोगों ने साफ तौर पर कह दिया आपसे हमें कोई शिकायत नहीं है. मन तो मेरी बहन का नहीं लगा.

फुलवारी शरीफ निवासी सूखी संपन्‍न परिवार आबिद की शादी 23 जून को रांची निवासी अंजूम के साथ हो गयी. दो भाई और तीन बहन में अंजुम सबसे छोटी थी उसका पुकारू नाम छोटी ही था. जब वह ससुराल आयी, तो पहली ही रात को जब दूल्‍हा उसके कमरे में गया, तो वह बेबाक बोल उठी प्‍लीज आप मुझे पंसद नहीं है. आप हम को टच नहीं कीजिएगा. नयी दुल्‍हन की बात सुन कर दूल्‍हा परेशान हो गया, मगर उसने हालात को समझ्‍ने के लिए कमरे से बाहर निकल दूसरे कमरे में सोना बेहतर समझा. यह बात घर और घर आए मेहमानों के बीच फैल गयी. सभी ने दुल्‍हन को समझाया. बहू भोज भी हुआ, मगर दूल्‍हा इस भोज से अपने आप को अलग रखा. यह बात दुल्‍हन के घर वालों तक गयी. लड़की पक्ष वालों ने फैसला लिया कि वह लडकी की विदाई नहीं करायेंगे, ताकि वह अपने शौहर से रिश्‍ता ठीक करे ले.

दोनों पक्षों के लोगों ने इस फैसले पर हामी भर दी. हुआ भी ऐसा ही, दूल्‍हा-दुल्‍हन अगल-बगल के कमरे में अकेले रहने लगे. इसके बाद लड़का लगातार 15 दिनों तक अपनी पत्‍नी को समझने के लिए लगातार 15 दिनों तक रात के समय उसका दरवाजा खटखटाता, मगर दुल्‍हन दरवाजा नहीं खोलती. दूल्‍हे ने मौके पर अपनी दुल्‍हन को घुमाने परिवार के सदस्‍यों के साथ कुछ दूर भी ले गया, मगर वहां भी बात नहीं बनी. एक बार फिर से यह बात लोगों ने दुल्‍हन के परिवार वालों को बतायी. इसके बाद बार हर एक घटना की जानकारी देते इधर लड़की वाले भी उसे समझाते, मगर बात बनती नजर नहीं आयी. तब लड़के ने अलग होने का फैसला लिया. एक घर में एक छत के नीचे पास-पास के कमरे में दोनों रहते, मगर एक-दूसरे से बात नहीं होती. लड़का अपने कमरे का दरवाजा खुला रखता, ताकि शायद उसकी बीवी को अपने किये पर पछतावा हो और वह वापस आ जाये. समय बीतता गया, मगर दोनों के बीच संबंध नहीं बन पाया. लड़का पक्ष वालों ने हर संभव प्रयास किया. पूरे सम्‍मान के साथ दुल्‍हन को घर रखा. इस बात से लड़की वाले भी वाकिफ थे. पहले माह, दूसरे माह और 23 अक्‍टूबर को तीसरा माह हो गया. लड़की के घर वाले आए और दोनों का रिश्‍ता हमेशा के लिए खत्‍म हो गया. रिश्‍ता टूटने का दर्द दोनों परिवार वालों के चेहरे पर साफ दिख रहा था.

लड़का पक्ष वालों ने लड़की की सम्‍मान पूर्वक विदाई कर दी. लड़का ने जेवरात भी दे दिया. कहा, हमें सदमा है, जाओ तुम अपनी जिंदगी जी लो. लड़का का एक शब्‍द जिससे सब का मन भर आया, व़ह यह था कि आप को विवाह के पूर्व लड़की की सहमति ले लेनी चाहिए थी. शायद उसकी पंसद और कोई हो. दूसरा शब्‍द, मां अब मुझे शादी के लिए मत कहना, हमें शादी के नाम से नफरत हो गयी है. जब दुल्‍हन जा रही थी, तब वह अपनी सास से लेकर हर किसी से गले मिली. सास ने कहा, हम अपने बेटे की जिंदगी आबाद करने के लिए तुम को लाये थे, मगर खुदा जो करता है, बेहतर ही करता है. जाओ खुश रहो, आबाद रहो. लड़की पक्ष वालों ने कहा- हमें आप लोगों से कोई शिकायत नहीं है, गलती मेरी बहन की है. लेकिन आबिद ने समाज के वैसे लोगों को संदेश दिया कि मन नहीं मिले तो तलाक ले लो, लेकिन इसके पहले उसे संभलने का एक मौका दो. ऐसा नहीं कि बस तीन बार तलाक बोल दो और रिश्‍ता तोड़ लो.

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