तस्वीर : कंगन घाट पर नए गुरुद्वारा का शिलान्यास

पटना : पटना में एक और गुरुद्वारे का निर्माण होने जा रहा है. इसमें कुल लागत 10 करोड़ आएंगे. कंगन घाट पर आज इसका विधिवत शिलान्यास किया गया.  10 करोड़ की लागत से कंगन घाट पर नये गुरुद्वारा का निर्माण किया जा रहा है. आज़ वैशाखी के अवसर पर नये गुरुद्वारा का शिलान्यास किया गया. जत्थेदार ज्ञानी एकबाल सिंह जी ने अरदास कर कार्यक्रम की शुरुआत की.  
बाबा विरा सिंह जी कार सेवा दिल्ली वाले और डॉ बाबा बलदेव सिंह जी के सहयोग से कंगन घाट नये गुरुद्वारा का निर्माण किया जा रहा हैं. 
गुरुद्वारा के शिलान्यास के मौके पर ज्ञानी इकबाल सिंह जत्थेदार पटना साहिब गुरुद्वारा, बाबा अवतार सिंह, प्रबंधक कमिटी के सदस्य महेंद्र सिंह छावड़ा, इन्द्रजीत सिंह जी यूके वाले मौजद थे. 
इस नये गुरुद्वारे  का निर्माण 15 माह तक पूरा कर लिया जायेगा. इस पूरे निर्माण की देखरेख पटना साहिब कारसेवा की देख रेख बाबा विरा जी के देख रेख में होगा. 
जानिए कंगन घाट का इतिहास
मान्यता है कि गुरु गोविंद सिंह जी का एक कंगन बचपन में यहां खेलते समय गुम हो गया था.

राजधानी पटना आने वाला प्रत्येक श्रद्धालु पटना के गंगा नदी के तट ‘कंगन घाट’ जाना चाह रहा है। यह घाट सिख संप्रदाय की श्रद्धा से जुड़ा हुआ है। सरकार भी इस प्रकाशोत्सव को लेकर यहां खास व्यवस्था की है.

तख्त हरमंदिर साहिब के रागी कविन्दर सिंह बताते हैं कि अपने ऐतिहासिक महत्व को समेटे यह घाट प्रकाश पर्व पर भी श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है.

कविन्दर सिंह कहते हैं, ‘श्री तख्त हरमंदिर साहब जी से कुछ ही दूरी पर स्थित कंगन घाट दशमेश मिता गुरु गोविंद सिंह जी ने कंगन घाट पर कई बाल लीलाएं की थीं। बालक गोविंद (गुरु गोविंद सिंह के बचपन का नाम) को गंगा की लहरों में अटखेलियां करना बेहद पसंद था। गुरु गोविंद सिंह जी महाराज एक अच्छे तैराक भी थे.’

श्री तख्त हरमंदिर साहिब के जत्थेदार ज्ञानी इकबाल सिंह कहते हैं कि गुरु जी महाराज बचपन में एक दिन कंगन घाट पर खेलने आए थे, तभी उनका एक कंगन गुम हो गया. जब उनकी मां ने उनके कंगन के विषय में पूछा, तब उसने दूसरे हाथ का कंगन भी फेंक दिया. कहा जाता है कि इसके बाद जो भी व्यक्ति गंगा नदी में कंगन ढूंढ़ने गया, उसे ही कंगन मिलता रहा.

इस घटना में गुरु जी के चमत्कार सामने आने के बाद इस घाट का नाम ‘कंगन घाट’ पड़ गया. वे कहते हैं कि केवल प्रकाशोत्सव के मौके पर ही नहीं ऐसे भी जो श्रद्धालु दरबार साहिब में मत्था टेकने आते हैं, वे कंगन घाट का दर्शन करने जरूर आते हैं. सरकारी स्तर पर तो इस बार श्रद्धालुओं के लिए तमाम सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं. 

कंगनघाट की एक विशेषता यह भी है कि यहां पर तीन जिलों की सीमाएं मिलती हैं. घाट का कुछ हिस्सा पटना, कुछ वैशाली और कुछ सारण जिले के अंतर्गत आता है. घाट के निर्माण और सुंदरीकरण कार्य के पहले तीनों जिलों के जिलाधिकारियों से सहमति ली गई थी.

 

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