हवन से बनाएँ, जीवन को चमन

हवन क्या है, इस बारे में क्या आपने कभी विचार किया है? हवन अथवा यज्ञ भारतीय परंपरा यानी हिंदू धर्म में शुद्धिकरण का एक कर्मकांड है. कुंड में अग्नि के माध्यम से देवता के निकट पहुंचने की प्रक्रिया को यज्ञ कहते हैं. भव्य अथवा हविष्य वह पदार्थ है जिसकी अग्नि में आहुति दी जाती है.

हवन कुंड में अग्नि प्रज्ज्वलित करने के पश्चात इस पवित्र अग्नि में फल, शहद, काष्ट इत्यादि पदार्थों की आहुति प्रमुख होती है. ऐसा माना जाता है कि यदि आपके पास किसी बुरी आत्मा इत्यादि का प्रभाव है तो हवन प्रक्रिया इससे आपको मुक्ति दिलाती है. स्वास्थ्य एवं समृद्धि इत्यादि के लिए भी हवन किया जाता है.

हवन के वैज्ञानिक फायदे:
लकड़ियां, जैसे कि पीपल, चंदन, आम्र, बिल्व, बबूल आदि पेड़ों की लकड़ियां और औषधीय जड़ी—बूटियां, गुग्गल आदि जिनको आम भाषा में हवन सामग्री कहा जाता है, को साथ मिलाकर जलाने से वातावरण मे जहां शुद्धता आ जाती है, वहीं हानिकारक जीवाणु 94 प्रतिशत तक नष्ट हो जाते हैं.

उक्त आशय के शोध की पुष्टि के लिए और हवन के धुएं का वातावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को वैज्ञानिक कसौटी पर कसने के लिए बंद कमरे में प्रयोग किया गया. इस प्रयोग में पांच दर्जन से ज्यादा जड़ी—बूटियों के मिश्रण से तैयार हवन सामग्री का इस्तेमाल किया गया. यह हवन सामग्री गुरकुल कांगड़ी हरिद्वार संस्थान से मंगाई गयी थी. हवन के पहले और बाद में कमरे के वातावरण का व्यापक विश्लेषण और परीक्षण किया गया, जिसमें पाया गया कि हवन से उत्पन्न औषधीय धुएं से हवा में मौजूद हानिकारक जीवाणु की मात्र में 94 प्रतिशत तक की कमी आयी.

इस औषधीय धुएं का वातावरण पर असर 30 दिन तक बना रहता है और इस अवधि में जहरीले कीटाणु नहीं पनप पाते.

धुएं की क्रिया से न सिर्फ आदमी के स्वास्थ्य पर अच्छा असर पड़ता है बल्कि यह प्रयोग खेती में भी खासा असरकारी साबित हुआ है.

वैज्ञानिक का कहना है कि पहले हुए प्रयोगों में यह पाया गया कि औषधीय हवन के धुएं से फसल को नुकसान पहुंचाने वाले हानिकारक जीवाणुओं से भी निजात पाई जा सकती है.  मनुष्य को दी जाने वाली तमाम तरह की दवाओं की तुलना में अगर औषधीय जड़ी—बूटियां और औषधियुक्त हवन के धुएं से कई रोगों में ज्यादा फायदा होता है और इससे कुछ नुकसान नहीं होता जबकि दवाओं का कुछ न कुछ दुष्प्रभाव जरूर होता है.

नवग्रह शांति के लिए समिधा:-

सूर्य की समिधा मदार की, चन्द्रमा की पलाश की, मङ्गल की खैर की, बुध की चिड़चिडा की, बृहस्पति की पीपल की, शुक्र की गूलर की, शनि की शमी की, राहु दूर्वा की और केतु की कुशा की समिधा कही गई है.
मदार की समिधा रोग को नाश करती है, पलाश की सब कार्य सिद्ध करने वाली, पीपल की प्रजा (सन्तति) काम कराने वाली, गूलर की स्वर्ग देने वाली, शमी की पाप नाश करने वाली, दूर्वा की दीर्घायु देने वाली और कुशा की समिधा सभी मनोरथ को सिद्ध करने वाली होती है.
इनके अतिरिक्त देवताओं के लिए पलाश वृक्ष की समिधा जाननी चाहिए.

धुआं मनुष्य के शरीर में सीधे असरकारी होता है और यह पद्धति दवाओं की अपेक्षा सस्ती और टिकाउ भी है.

ज्योतिषाचार्य प्रशांत कुमार

             संपर्क सूत्र: 8100778339              

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