‘किसानों से वादा खिलाफी मोदी सरकार की उपलब्धि’

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पटना (नियाज़ आलम) :  केन्द्र की मोदी सरकार के तीन साल पूरे होने वाले हैं, ऐसे में उनके चुनावी वादे कितने पूरे हुए हैं, इसे लेकर विपक्ष लगातार हमलावर है. इसी क्रम में बिहार की सत्तारूढ़ पार्टी जनता दल यूनिटड ने केंद्र सरकार पर एक बार फिर निशाना साधा है. पार्टी के मुख्य प्रवक्ता संजय सिंह ने शानिवार को रोज़गार के मुद्दे पर मोदी सरकार को घेरने के बाद रविवार को किसानों का मुद्दा उठाया है.

उन्होंने खाद्यान्नों का न्यूनतम दर लागत मूल्य को लेकर मोदी सरकार पर किसानों से वादा खिलाफी का आरोप लगाया है. संजय सिंह ने कहा है की 2014 लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने खाद्यान्नों का न्यूनतम दर लागत मूल्य में 50 प्रतिशत मुनाफा जोड़कर तय करने की बात कही थी. जदयू प्रवक्ता ने कहा कि मोदी सरकार के तीन साल हो गए लेकिन इस दिशा में कोई काम नही किया गया है.

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उन्होंने कहा है कि क्या किसानों के साथ वादा खिलाफी को भाजपा और केंद्र सरकार अपनी उपलब्धि मान रही है?
संजय सिंह ने कहा है कि केंद्र सरकार खुद लोकसभा पटल पर 28 मार्च 2017 को कहती है कि उसने गेहूं का न्यूनतम मूल्य 1525 रु से बढ़ा कर 1625 रु किया है. जदयू प्रवक्ता ने कहा कि क्या भाजपा के मंत्रियों को यह जवाब देते वक़्त अपने चुनावी वादे याद नहीं आये?

इसके साथ ही संजय सिंह ने केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह को भी आड़े हाथों लिया. उन्होंने कहा कि केंद्रीय कृषि मंत्री बिहार के हैं, इसके बावजूद उन्होंने देश तो क्या अपने राज्य और ज़िले के लिए भी कुछ नहीं किया. जदयू प्रवक्ता ने कहा कि राधामोहन सिंह केवल बिहार आ कर फोटो खिंचवाते हैं और चले जाते हैं.

उन्होंने सवाल किया की क्या कृषि मंत्रालय का नाम बदलकर कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय रखने भर से किसानों का कल्याण हो जायेगा? जदयू प्रवक्ता ने कहा के 2014 लोकसभा चुनाव मविं नरेंद्र मोदी ने पूरे देश में घूम घूमकर वादा किया लेकिन धरातल पर एक भी वादा पूरा नहीं हुआ. संजय सिंह ने कहा है की जदयू हर 1-2 दिन पर मोदी सरकार से सवाल पूछता रहेगा. मोदी सरकार मे एक भी काम किया है तो बताये.

जदयू प्रवक्ता निखिल मंडल ने कहा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जीएम फसलों के संदर्भ में कई बार कहा है कि यह देश की कृषि के लिए खतरनाक है और नीतिगत स्तर पर किसान विरोधी है. इन सबके बावजूद केंद्र ने जीएम फसलों पर अपनी स्थिति साफ नहीं की है. मंडल ने कहा कि इससे किसान पूरी तरह विदेशी बीज कंपनियों के भरोसे हो जाएंगे. इससे देश की कृषि स्वायत्ता पर सवालिया निशान भी लग जायेगा. मंडल ने सवाल किया है कि क्या भाजपा चाहती है कि किसान विदेशी बीज कंपनियों पर निर्भार हो जाएं. क्या यही भाजपा का राष्ट्रवाद है?

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