पटना में दवा कारोबारियों की हड़ताल का असर, दुकानें बंद होने से मरीज परेशान

पटना(नियाज आलम) :  दवा व्यवसायियों की हड़ताल का असर आज मंगलवार को राजधानी पटना में खूब देखने को मिला. तमाम दवा दुकानों का शटर गिरा रहा. लोग काफी परेशान दिखें. उधर पटना की जवा मंडी गोविंद मित्रा रोड में भी सन्नाटा छाया रहा. बता दें कि देश भर में दवा दुकानदारों ने मंगलवार को दुकान बंद रखने का निर्णय लिया है. दवा की बिक्री के लिए सरकार की ओर से तय किए गए कड़े नियमों का केमिस्ट एसोसिएशन की ओर से विरोध किया जा रहा है. हड़ताल के चलते करीब 9 लाख दवा की दुकानें देशभर में बंद हैं.

मालूम हो कि हड़ताल की घोषणा ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट (एआईओसीडी) की ओर से की गई है. एसोसिएशन का कहना है इस बावत सरकार को कई ज्ञापन दिए गए लेकिन मांग नहीं माने जाने पर एक दिन के लिए हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया गया है. एसोसिएशन की ओर से ऑन लाइन दवा बिक्री करने का भी विरोध किया जा रहा है. इसके अलावा सरकार ने कहा है कि उन्हें हर दिन बेची गई दवा की जानकारी पोर्टल पर देनी होगी.

ये है दवा विक्रेताओं की चिंता

दरअसल, सरकार ने कहा है कि दवा विक्रेताओं को डॉक्टर की पर्ची को वेबसाइट पर अपलोड करना होगा, तभी वह किसी को दवा दे सकेंगे. लेकिन ये काम करना इतना आसान नहीं होगा. वजह है कि लाइट न होने या लिंक फेल होने से दवा बेची नहीं जा सकेगी, जिससे मरीजों को परेशानी होगी और स्थिति कंट्रोल से बाहर हो जाएगी.

वहीं छोटे दवा विक्रेताओं का कहना है कि जो कम मात्रा में फुटकर में दो-चार गोली बेचते हैं, ऐसे विक्रेताओं को हर बिक्री को अपडेट करना संभव नहीं होगा. वहीं, कुछ का कहना है कि सभी दवा दुकानों पर कंप्यूटर भी नहीं है. ऐसे में ऑनलाइन फार्मेसी से उनके बिजनेस को नुकसान होगा. साथ ही दवाइयों के गलत इस्तेमाल और नकली दवाओं की बिक्री को बढ़ावा मिलेगा. इस मामले को लेकर AIOCD दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट कर सकता है.

 

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